Friday , July 20 2018

प्राइवेट बिजली कंपनियों में बैंकों के फंसे 2.20 लाख करोड़ रुपये- रिपोर्ट

कर्ज नहीं चुका पाने की वजह से फंसी हुई बिजली परियोजनाओं को बचाने की सरकार की कोशिशों को देखते हुए निजी क्षेत्र की बिजली कंपनियों ने नया पैंतरा फेंका है। उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि अगर उनके ऊपर बकाया बैंकों के कर्ज का 70 फीसद तक माफ कर दिया जाए तो वह स्वयं ही इन परियोजनाओं को नए सिरे से चालू कर सकती हैं।

निजी क्षेत्र की बिजली कंपनियों का यह रुख तब सामने आया है, जब केंद्र सरकार ने इनकी फंसी हुई बिजली परियोजनाओं को सरकारी क्षेत्र की बिजली कंपनियों के जरिये अधिग्रहित करने की मंशा व्यक्त की है। देश में तकरीबन 40 हजार मेगावाट क्षमता की दो दर्जन से ज्यादा ऐसी परियोजनाएं हैं, जिनमें बैंकों का फंसा कर्ज यानी एनपीए 2.25 लाख करोड़ रुपये का है।

कर्ज नहीं चुका पाने की वजह से इन परियोजनाओं पर काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इनमें से 15 हजार मेगावाट क्षमता की ऐसी परियोजनाएं हैं, जिन पर काम पूरा हो गया है लेकिन आगे की पूंजी नहीं होने की वजह से इनसे उत्पादन नहीं हो पा रहा है। इन परियोजनाओं को उबारने पर केंद्र सरकार लगातार मंथन कर रही है।

वित्त मंत्रालय का कहना है कि इन सभी परियोजनाओं पर नया दिवालिया कानून लगाया जाना चाहिए। वहीं, बिजली मंत्रालय अपने तहत आने वाली सरकारी बिजली कंपनियों मसलन एनटीपीसी, पीएफसी को मिलाकर एक कंसोर्टियम बनाने पर विचार कर रहा है।

यह कंसोर्टियम फंसी बिजली परियोजनाओं में से कुछ को खरीदने की स्थिति में होगा। ऐसा होने पर ये परियोजनाएं निजी क्षेत्र की बिजली कंपनियों के हाथों से निकल जाएंगी।

बिजली कंपनियों के प्रतिनिधियों की तरफ से इस बारे में सरकार को समझाने की कोशिश हो रही है कि उनकी परियोजनाएं प्रबंधन की दिक्कतों की वजह से नहीं लटकी हुई हैं कि उन्हें कंसोर्टियम में हस्तांतरित करके दिक्कतों को दूर किया जाए।

ये परियोजनाएं मुख्य तौर पर बैंकों का कर्ज नहीं चुका पाने की वजह से फंसी हुई हैं। इस समस्या का समाधान निकाला जाए तो कई परियोजनाओं में कुछ हफ्तों में बिजली उत्पादन शुरू हो सकता है।

TOPPOPULARRECENT