Wednesday , April 25 2018

रिपोर्ट : बिहार में साम्प्रदायिक हिंसा का कारण भाजपा और बजरंग दल की गुंडई

पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सात सदस्यीय तथ्यात्मक टीम ने खुलासा किया है कि बिहार में ‘अपमानजनक और अत्यधिक आपत्तिजनक गाने’ से लोड सीडी और पेन ड्राइव अग्रिम रूप से वितरित थे, जिसके चलते रामनवमी के बाद सांप्रदायिक भड़क उठी थी।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि भाजपा के कैबिनेट मंत्री अश्विनी कुमार चौबे के बेटे अरिजीत, भाजपा सांसद सुशील कुमार सिंह और कांग्रेस के विधायक आनंद शंकर सिंह के दंगों में संलिप्तता के प्रमाण हैं। यह बहुत स्पष्ट था कि हिंसा अप्रत्याशित नहीं थी, लेकिन पूर्व-नियोजित और बहुत सावधानी से भाजपा और बजरंग दल गुंडों द्वारा इसको अंजाम दिया गया था।

एनजीओ जॉइंट अँग्रेस्ट हेट ने सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा, टीम ने यह भी दखा कि एक ही गीत लाउडस्पीकरों के माध्यम से प्रभावित जिलों में लगाया गया था, जो दर्शाता है कि यह एक नियोजित था।

लेखकों में से एक प्रशांत टंडन भी उद्धृत करते हुए कहा कि हिंसा की बड़े पैमाने पर योजना बनाई गई थी। बड़ी संख्या में तलवारें ऑनलाइन खरीद ली गईं थी। गृह सचिव ने कहा कि हालांकि खुफिया जानकारी इसके बारे में थी, लेकिन वे इसे रोक नहीं पाए थे।
एक आश्चर्यजनक रहस्योद्घाटन में मुख्य सचिव (गृह) अमीर सुभानी के हवाले से कहा गया है कि ऑनलाइन पोर्टल से करीब दो लाख तलवारें खरीदी गई थीं।

तथ्य खोजी टीम के सदस्यों ने नालंदा में पुलिस स्टेशन के अंदर लटका भगवा झंडा पाया जिस पर जय श्रीराम और बजरंग दल लिखा था। रिपोर्ट में समस्तीपुर के ज़िया उल उलूम मदरसा के मौलाना नजीर अहमद नदवी ने कहा है कि यदि उनके पड़ोसी डॉ अशोक की मदद नहीं की गई होती तो भीड़ उनको मार सकती थी। इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 65 से अधिक घायल हो गए।

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