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भारतीय जनता पार्टी और उसकी वैज्ञानिक समझ

8 फरवरी को अगरतला की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कुछ लोग किस्मत और जीवन बेहतर करने के लिए रत्नों की अंगूठी पहनते हैं लेकिन यदि आप गलत (‘माणिक’) पहन लें तो इससे दिक्कत हो सकती है। त्रिपुरा में गलत मानिक (सीएम) थे, अब समय आ गया है कि इसे उतार दें और एक हीरा पहने जिसका अनुवाद किया (एच-हाईवे, आई-आईवे, आर-रेलवे, ए-एयरवे)।

नामों की शॉर्ट फॉर्म के लिए मोदी का प्यार जगजाहिर है लेकिन पौराणिक और अस्‍पष्‍ट बातों की ओर अक्‍सर उनके झुकाव के बारे में कम बात हुई है। उनका सबसे नया दावा कि रत्‍नों से अच्छी किस्मत आ सकती है, इसका विज्ञान में कोई आधार नहीं है। ना सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी बल्कि उनकी पार्टी के कई प्रमुख सदस्य जो महत्वपूर्ण पदों पर है, उन्होंने भी विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में प्राचीन भारत की सर्वश्रेष्ठता पर जोर देने के लिए ऐसे कई बयान दिए हैं। ऐसा करते हुए वे एकदम गलत बयान से लेकर अजीबोगरीब बयान तक दे डालते हैं।

हिंदू पौराणिक कथाओं का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि भगवान गणेश प्लास्टिक सर्जरी के सबसे पहला उदाहरण थे। प्रधानमंत्री मोदी ने एक से अधिक बार इस बात को दोहराया है। इस घटना के अलावा उन्होंने अक्टूबर 2014 को मुंबई में मेडिकल प्रोफेशनल्स की बैठक को संबोधित करते हुए भी इसका हवाला दिया था।

महाभारत के एक पात्र कर्ण का जन्म जेनेटिक इंजीनियरिंग की वजह से हुआ था, ऐसा दावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “जिन्होंने महाभारत पढ़ा है या सुना है उनको मैं महाभारत की तरफ ले जाना चाहता हूं और मेरी जो छोटी सी समझ है उसके हिसाब से मुझे लगता है कि कर्ण का जो जन्म हुआ था वो स्टेम सेल का साइंस था टेक्नोलॉजी थी।

मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने यह कहकर विवाद और काफी मनोरंजन पैदा कर दिया कि मानव विकास के बारे में चार्ल्स डार्विन की थ्योरी वैज्ञानिक रूप से गलत है क्योंकि किसी ने भी बंदर को आदमी में बदलते हुए नहीं देखा।

डार्विन वाला अपना मशहूर बयान देने से पहले मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह जी ने सितंबर 2017 में कहा कि आईआईटी जैसे प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में प्राचीन भारत की खोजों और आवश्यक आविष्कारों के बारे में अवश्य पढ़ाया जाना चाहिए जैसे पुष्‍पक विमान जिसका जिक्र रामायण में किया गया है।

आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री श्रीपद नायक ने 2016 में कहा कि योग से कैंसर सहित प्रमुख बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को एक वर्ष में इसका वैज्ञानिक प्रमाण प्राप्त हो सकता है।

हरिद्वार के बीजेपी सांसद और उत्तराखंड के भूतपूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के अनुसार भारत परमाणु तकनीक से कभी भी अनजान नहीं रहा. असल में एक ऋषि ने कई लाख वर्ष पहले परमाणु परीक्षण किया था।

राजस्थान के शिक्षा व पंचायती राज मंत्री वासुदेव देवनानी ने ‘गाय का वैज्ञानिक महत्व’ बताने के लिए एक स्वदेशी सिद्धांत सामने रखा. देवनानी के अनुसार गाय एकमात्र जीव है जो ऑक्‍सीजन लेता और छोड़ता है. रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने यह भी कहा था कि जुकाम और खांसी जैसी बीमारियां तो गाय के निकट जाने से ही ठीक हो सकती हैं।

देवनानी एक बार फिर से गलती करते हुए पकड़े गए जब उन्होंने हाल ही में बयान दिया कि न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत की खोज नहीं की थी. असल में यह खोज भारतीय वैज्ञानिक ब्रह्मगुप्त द्वितीय द्वारा न्यूटन से 1000 साल पहले की गई थी।

केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि ‘यौगिक खेती’ को अपनाकर मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाया जा सकता है और ‘बीज को ताकतवर’ बनाया जा सकता है।

असम के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि उन लोगों को कैंसर जैसी प्राणघातक बीमारियां होती है जिन्होंने पिछले जन्म में पाप किए थे।

हमारे देश के संस्थापकों ने वैज्ञानिक चेतना व चिंतन की शिक्षा द्वारा तर्कसंगत सिद्धांतों पर आधारित समाज और देश की कल्पना की थी। भाजपा के प्रमुख सदस्यों और पदाधिकारियों द्वारा समय-समय पर दिए जाने वाले बयानों पर ध्यान देने से ऐसा लगता है कि वैज्ञानिक तथा तार्किक भावनाओं को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य पूरा होने से अभी काफी दूर है।

संविधान में बताया गया एक बुनियादी कर्तव्य है, ‘वैज्ञानिक चेतना, मानववाद और जांच तथा सुधार की भावना विकसित करना’। वैज्ञानिक संस्कृति के विस्‍तार को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार सरकार इसके बजाय ऐसे अजीब, अंधश्रद्धा से भरपूर और झूठी वैज्ञानिक विचारों के पक्ष में खड़ी नजर आती है। इस प्रवृत्ति को विश्वसनीयता खुद प्रधानमंत्री ने प्रदान की है जिन्होंने पौराणिक कथाओं को विज्ञान के समक्ष खड़ा किया और इस प्रक्रिया में राजनीति की वेदी पर विज्ञान को कमजोर बनाया है।

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