भाजपा सांसद ने अपनी ही सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, लगाया साजिश का आरोप

भाजपा सांसद ने अपनी ही सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, लगाया साजिश का आरोप

बीजेपी के दलित सांसदों के भीतर अपनी सरकार की नीतियों को लेकर नाराजगी बढ़ती दिख रही है. उत्तरप्रदेश के बहराइच से बीजेपी की सांसद सावित्री बाई फुले ने अपनी ही पार्टी पर आरक्षण को खत्म करने की साजिश का आरोप लगाया है. सावित्री बाई अब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मुद्दे पर लखनऊ में एक अप्रैल को एक रैली करने जा रही हैं. उनकी रैली का विषय है भारत सरकार की दलित-आदिवासी विरोधी नीतियां.

उन्होंने कहा है कि आरक्षण खत्म करने की साजिश चल चल रही है. यही नहीं उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के खिलाफ बीजेपी के सहयोगी पहले ही नाराजगी जता चुके हैं. इनमें सुहेलदेव पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर सबसे ज्यादा मुखर हैं.

उत्तर प्रदेश के बहराइच से बीजेपी की सांसद सावित्री बाई फुले एक अप्रैल को लखनऊ में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ रैली करने जा रही है।
फुले की यह रैली केंद्र सरकार की एससी-एसटी विरोधी नीतियों के खिलाफ होगी।

केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद यह पहला ऐसा मौका है जब पार्टी की सांसद अपनी सरकार के खिलाफ दलितों के मुद्दे पर रैली करने जा रही हैं।
बीजेपी सांसद की इस रैली से विपक्ष के केंद्र सरकार के दलित विरोधी होने के आऱोपों को बल मिलेगा।

इससे पहले गुजरात में दलितों के खिलाफ हुई हिंसा को लेकर बीजेपी के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो चुका है वहीं महाराष्ट्र में भी भीमा-कोरगांव हिंसा को लेकर राज्य सरकार दलित संगठनों के निशाने पर है।

इस बीच एक अन्य घटनाक्रम में अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की गुजारिश करने वाले हैं।

अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट-1989) के प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद राजनीतिक दलों के साथ-साथ कई संगठन भी इसका विरोध कर रहे हैं।

इनका मानना है कि एक्ट में बदलाव से दलितों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

विपक्षी दलों के अलावा सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कई दलित सांसदों ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय पर सरकार से पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग की है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट के दुरुपयोग का हवाला देते हुए तत्काल गिरफ्तारी के प्रावधान पर रोक लगा दी थी, साथ ही कोर्ट ने ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत का प्रावधान भी जोड़ दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मामला दर्ज होने के पहले जांच की जाएगी उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।

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