मॉब लिंचिंग की घटनाओं वाले इलाके से बुरी तरह हार गई बीजेपी !

मॉब लिंचिंग की घटनाओं वाले इलाके से बुरी तरह हार गई बीजेपी !

मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं से राजस्थान भी बच नहीं पाया। अलवर और भरतपुर में गाय के नाम पर उपद्रवी भीड़ ने मुस्लिमों युवकों की हत्या कर दी थी, जिसके बाद ये दोनों जिले पिछले दो साल में सबसे ज्यादा चर्चा में थे। बीजेपी शासित राज्य राजस्थान में जहां भी मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएं हुई थी, वहां बीजेपी को इस बार हार का सामना करना पड़ा है। राजस्थान में पहलू खान, उमर खान और रकबर खान जैसों की हत्याएं मॉब लिंचिंग का शिकार बनी है। बता दें कि अलवर और भरतपुर दोनों जगहों पर मिलाकर कुल 18 सीटों में से बीजेपी को सिर्फ दो सीट पर जीत हासिल हुई है।

अलवर से बीजेपी का सफाया राजस्थान के अलवर जिले में हरियाणा के रहने वाले मुस्लिम युवक पहलू खान को गोहत्या के शक में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला। पिछले साल अप्रैल 2017 में हुई इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। इसके बाद इसी साल जुलाई में रकबर खान नाम के एक और शख्स को गो तस्करी के आरोप में पीट-पीट कर मार दिया गया था।

अलवर जिले के कुल 11 विधानसभा सीटों पर बीजेपी सिर्फ 2 सीट जीतने में कामयाब रही है। अलवर के मुंडावर सीट से बीजेपी प्रत्याशी मंजीत धरमपाल चौधरी और अलवर शहर से संजय शर्मा ने जीत हासिल की है। वहीं, 6 सीटों पर कांग्रेस ने और 2 सीटों पर बसपा ने कब्जा किया है। वहीं, 1 सीट पर अभी निर्णय आना बाकि है। भरतपुर में का सूपड़ा साफ अलवर के बाद भरतपुर भी मॉब लिंचिंग जैसी घटना का गवाह बना, जहां गो तस्करी के आरोप में उमर खान नाम के शख्स की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। पिछले साल नवंबर में भरतपुर के थाना पहाड़ी के गांव घाटमीका के उमर खान का शव अलवर-मथुरा रेलवे ट्रैक पर बिलासपुर के पास पड़ा मिला था। भरतपुर से भी बीजेपी सफाया हुआ है, जहां से एक भी सीट नसीब नहीं हो पाई है। भरतपुर जिले के 7 सीटों पर कांग्रेस ने सबसे अधिक 4 और बसपा को 2 सीट पर जीत मिली है। वहीं, एक सीट पर आरलएडी ने बाजी मारी है।

स्टेट में कथित गोरक्षकों का सपोर्ट कर चुकी है बीजेपी जब अलवर में पहलू खान को पीट-पीट कर मार दिया गया, तब राजस्थान के तत्कालीन गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने उन कथित गोरक्षकों का ही सपोर्ट करते दिखे, जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया। कटारिया ने अवैध रूप से जानवरों का ट्रांसपोर्ट का हवाला देते हुए पीड़ितों को ही दोषी ठहराया था। वहीं, बीजेपी के राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने तो अलवर जैसी घटना को मॉब लिंचिंग होने से इनकार कर दिया था। इस पूरे विवाद पर तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे हमेशा बचती हुई दिखी। गौरतलब है कि पिछले साल राजस्थान में गोहत्या से जुड़े 400 से भी ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं।

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