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टेंडर को लेकर गुंडों के साथ आ पहुंचे भाजपा विधायक, अधिकारी को धमकाया

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में बीजेपी विधायक ने बीएसए को धमकाया और उनके साथ बदतमीज़ी की । मामला ई टेंडरिंग और बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़ा हुआ है । बेसिक शिक्षा विभाग के हॉस्टल में सामानों की आपूर्ति के लिए ई टेंडर निकाला गया था जिसकी शिकायत ठेकेदारों ने बीजेपी विधायक ने कर दी । और बीजेपी विधायक पहुंच गए बीएसए को धमकाने ।

दरअसल जिले के बेसिक शिक्षा विभाग ने चल रहे कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय में से पांच में सामानों की आपूर्ति के लिए ई टेंडर निकाल दी । 12 सितम्बर को टेंडर जारी कर कहा गया कि जिले के केजीबीवी नगर, देहात, श्रीदत्तगंज, रेहरा बाजार व गैंडास बुजुर्ग में सामानों की आपूर्ति की जानी है।

इसके लिए 13 से 21 सितम्बर तक आनलाइन आवेदन मांगे गये थे । 22 सितम्बर को विभाग के कार्यालय में ही निविदा को खोला जाना था । लेकिन टेंडर आनलाइन होते ही सेटिंग वाले ठेकेदारों के पसीने छूटने लगे। सूत्रों की मानें तो 13 सितम्बर को पहले से ही केजीबीवी में सामानों की आपूर्ति का काम कर रहे ठेकेदार बीजेपी सदर विधायक पल्टूराम को लेकर सिविल लाइंस स्थित बीएसए आवास पर आ धमके । भारी दल बल के साथ विधायक ने बीएसए रमेश यादव को खूब खरी खोटी सुनाई। उस वक्त जिले के कई शिक्षक भी मौके पर मौजूद थे।

बीजेपी विधायक के गुर्गों ने बीएसए से अभद्रता की, ये लोग बीएसए पर ईं टेंडरिंग को कैंसल करने का दबाव बना रहे थे । बीएसए ने मामले को बढ़ता देख डीएम राकेश कुमार मिश्र को मोबाइल पर शिकायत की। डीएम उस वक्त देवी पाटन मंदिर में नवरात्रि तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में मौजूद थे।

डीएम ने एसपी प्रमोद कुमार को मामले की जानकारी दी और बीएसए के घर पर पुलिस बल भेजने को कहा। मौके पर पुलिस बल के साथ पहुंचे नगर कोतवाल गंगेश शुक्ला ने मौके की नजाकत को भांपते हुए समझाने बुझाने का रास्ता अपनाया। काफी देर गहमा गहमी के बाद विधायक अपने गुर्गो के साथ वहां से चले गये ।
आखिर हुआ वही जिसके लिए बीजेपी विधायक ने बीएसए को धमकाया । 14 सितम्बर को बीएसए ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए आखिरकार ई टेंडर निरस्त कर दिया। बीएसए ने मामले में बताया कि ई टेंडरिंग में खामियों के चलते ऐसा किया गया है। टेंडर में तकनीकी समस्या आ रही है।

बीएसए से अभद्रता के मामले में सदर विधायक पल्टूराम का कहना है कि बीएएस रमेश यादव के खिलाफ तमाम शिकायतें आ रहीं है। शिक्षकों के स्थानान्तरण और तैनाती के नाम पर बीएसए अवैध रूप से धन उगाही कर रहे हैं। कुछ दिन पहले जब डीएम ने शिकायत के बाद बीएसए को कलेक्टेट में बुलाया गया तो वे नहीं आये। इसी कारण से बीएसए निराधार आरोप लगा रहे हैं।

धमकी के बाद बीजेपी विधायक ई टेंडरिंग कैंसिल कराने में कामयाब रहे और ट्रांसफर , तैनाती और निलंबन को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाले बीएसए भी बैकफुट पर आ गये है ।

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