Monday , July 23 2018

2 से ज़्यादा बच्चे पैदा करने वाले को न तो सरकारी नौकरी और न ही चुनाव लडऩे का अधिकार देना चाहिये- भाजपा सांसद

देश की बेतहाशा बढ़ती आबादी पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या नीति -2०18 तैयार करने और जनसंख्या विस्फोट से निपटने के लिए प्रोत्साहन के साथ-साथ कठोर नीति भी बनाये जाने की मांग आज लोकसभा में उठी। भारतीय जनता पार्टी के राघव लखनपाल ने यथाशीघ्र जनसंख्या नियंत्रण के लिए कठोर नीति बनाये जाने की मांग संबंधी निजी संकल्प सदन में पेश करते हुए कहा कि देश की आबादी तेज रफ्तार से बढ़ रही है और यदि इसे तत्काल नियंत्रित नहीं किया गया तो अगले 5० वर्ष में आबादी का संतुलन बिगड़ जायेगा, जिसके गम्भीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि जनसंख्या विस्फोट की स्थिति से निपटने के लिए सरकार को न केवल प्रोत्साहन की नीति पर विचार करना चाहिए, बल्कि कुछ कठोर उपाय भी किये जाने चाहिएं, अन्यथा इसका असर आने वाली पीढ़ी पर भी पड़ेगा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के एक सर्वेक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि आबादी वृद्धि की रफ्तार पर नियंत्रण नहीं किया गया तो 2०24 तक भारत की जनसंख्या 144 करोड़, 2०3० तक 156 करोड़ और 2०5० तक 166 करोड़ तक पहुंच जायेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार में कुल प्रजनन दर (टीएफआर) तीन से ऊपर है, जबकि झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में यह 2.6 से 2.9 के बीच है। श्री लखनपाल ने इस बात को लेकर भी सवाल उठाये कि देश में एक खास समुदाय की आबादी अनियंत्रित गति से बढ़ रही है। उन्होंने इसके लिए सरकार को चिंतन करने की भी आवश्यकता जतायी। उन्होंने आशंका जतायी कि यदि जनसंख्या नियंत्रण के लिए ठोस नीति नहीं बनाई गई, तो इसमें कोई संदेह नहीं कि हिन्दू समुदाय देश में अल्पसंख्यक बनकर रह जायेगा। श्री लखनपाल ने देश में ‘दो-बच्चों की नीतिÓ बनाने की सलाह देते हुए कहा कि दो बच्चे वाले परिवार को प्रोत्साहन राशि और सरकारी सब्सिडियों का अधिक लाभ दिया जाना चाहिए, जबकि तीसरे बच्चे को न तो सरकारी नौकरी में जगह दी जानी चाहिए, न ही उन्हें किसी पद के लिए चुनाव लडऩे का अधिकार दिया जाना चाहिए।

भाजपा के ही रवीन्द्र कुमार राय ने कहा कि देश के सामने जनसंख्या विस्फोट के खतरे को समाप्त करने का उचित समय आ गया है। उन्होंने इस मामले में’एक देश एक जनÓके नजरिये से विचार करने की आवश्यकता जतायी। श्री राय ने आबादी के घनत्व संबंधी एक आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि पोलैंड में जहां आबादी का घनत्व 21 व्यक्ति प्रति 1०० एकड़, चेकोस्लोवाकिया में 31, हंगरी में 3० और इंग्लैंड में छह व्यक्ति प्रति 1०० एकड़ है, वहीं भारत में यह औसत 148 व्यक्ति प्रति 1०० एकड़ है। भाजपा के ही निशिकांत दुबे ने कहा कि आजादी के पहले से ही जनसंख्या नियंत्रण पर तमाम नीतियां बनी, लेकिन वे लागू नहीं हुई, जिससे हमारी आबादी 33 करोड़ से 13० करोड़ पहुंच गई। उन्होंने कहा कि आबादी बढने का मुख्य कारण समुदाय विशेष में इसे लेकर जागरूकता का न होना, बंगलादेशियों की घुसपैठ और लड़कों की चाहत है। श्री दुबे ने भी जनसंख्या नियंत्रण के लिए दो बच्चों की नीति बनाने की वकालत करते हुए इसका पालन न करने वालों को सरकारी सुविधाओं से वंचित किये जाने का सुझाव दिया। उन्होंने लैगिंक अनुपात का पता लगाने के लिए इसका धर्म के आधार पर सर्वेक्षण कराने का भी सुझाव दिया। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि परिवार नियोजन सम्बन्धी निर्णय लेने में महिलाओं की भूमिका नगण्य है। उन्होंने कहा कि यदि लड़की होने पर या परिवार नियोजन सम्बन्धी मामलों को लेकर परिवार के सदस्यों या समाज द्वारा महिला को प्रताडि़त किया जाता है, तो इसे रोकने के लिए महिला उत्पीडऩ कानून में विशेष प्रावधान किया जाना चाहिए। उन्होंने आबादी नियंत्रण के लिए जागरूकता पैदा करने, स्वास्थ्य क्षेत्र का बजट बढ़ाने तथा महिलाओं की साक्षरता दर बढ़ाने की भी जरूरत बतायी।

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