क्या मुसलमानों का अब बीजेपी पर होने लगा है भरोसा?

क्या मुसलमानों का अब बीजेपी पर होने लगा है भरोसा?

लोकनीति-सीएसडीएस मतदान उपरांत सर्वे (2019) के अनुसार लगभग 8 फीसदी मुसलमानों ने बीजेपी को वोट दिया। लगभग 15 फीसदी चाहते थे कि मोदी सरकार वापस आए। इन आंकड़ों से भारतीय जनता पार्टी को ये उम्मीद अवश्य बंधी होगी कि वह मुस्लिम वोट बैंक में भी बड़ा सेंध लगा सकती है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन (सपा-बसपा) को एकमुश्त मुसलमान वोट मिला। उन्हें जो 15 सीटें मिलीं, उसमें 6 मुसलमान थे। अगर ये वोट हिले तो पहले ही काफी कमजोर हो चुके गठबंधन का टिकना मुश्किल हो जाएगा।

नया इंडिया डॉट कॉम के अनुसार, तो क्या भाजपा अब इसी रणनीति पर काम कर रही है? ये भी ध्यान देने की बात है कि मोदी के विजयी होने के बाद से ही कई मुस्लिम संगठनों की तरफ से भी बधाई संदेशों का तांता लग गया।

इसके पहले पिछले महीने लोकसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच लखनऊ में शिया धर्मगुरु मौलाना सय्यद कल्बे जव्वाद नकवी ने प्रेस कांफ्रेंस कर लखनऊ लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार राजनाथ सिंह के समर्थन का एलान कर दिया। मगर तब मौलाना जव्वाद ने बताया कि उन्होंने एक व्यक्ति विशेष का समर्थन किया है।

किसी पार्टी का नहीं। राजनाथ सिंह लखनऊ से 3.47 लाख वोट से चुनाव जीत गए। दोबारा सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने कई ऐसे एलान किए, जो बीजेपी की मुसलमान-विरोधी छवि रखने वालों को हैरानी में डाल रहे हैं।

बीते 11 जून को मौलाना आजाद नेशनल एजुकेशन फाउंडेशन की 112वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने मोदी सरकार के राज में अल्पसंख्यकों का रोड मैप सामने रख दिया। इसमें स्कूल ड्रॉप-आउट बच्चों को ब्रिज कोर्स करवा कर मेनस्ट्रीम एजुकेशन में लाना शामिल है।

मदरसों को मुख्यधारा में लाने के लिए वहां हिंदी, इंग्लिश, गणित और विज्ञान की शिक्षा देने की बात है। यहीं नहीं, अल्पसंख्यक वर्ग के पांच करोड़ छात्रों को अगले पांच साल में छात्रवृत्तियां दी जाएंगी। शैक्षिक संस्थानों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही करीब आधा दर्जन से अधिक योजनाओं में तेजी लाई जाएगी। इसके अलावा मुसलमानों की वक्फ प्रॉपर्टी का विकास किया जाएगा।

इन प्रॉपर्टीज पर स्कूल, कॉलेज, सामुदायिक भवन इत्यादि खोलने के लिए 100 फीसदी फंडिंग की व्यवस्था करने की योजना है। हज का कोटा भी इस बार बढ़ा कर दो लाख कर दिया गया है। क्या ऐसी घोषणाओं से मुसलमान प्रभावित होंगे? ये देखने की बात होगी, क्योंकि फिलहाल विश्वास की खाई गहरी है।

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