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बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला : इस्लाम कुबूल करने वाली महिला कर सकती है पिता की संपत्ति पर दावा

मुंबई। यदि पिता की मौत हो जाए और उन्होंने कोई वसीयत न तैयार की हो तो धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने वाली हिंदू महिला भी पिता की संपत्ति पर अपने हिस्से का दावा कर सकती है, यह फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनाया। नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार जस्टिस मृदुला भाटकर ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को बदलने से इनकार कर दिया जिसमें 54 वर्षीय बहन की अपील के बाद मुंबई के 68 वर्षीय निवासी को माटुंगा में उनके पिता के फ्लैट को तोड़ने या बेचने से रोक दिया गया था।

युवक ने दावा किया था कि उसकी बहन ने 1954 में इस्लाम स्वीकार कर लिया था और इसलिए पिता की संपत्ति पर उनका हक खत्म हो जाता है क्योंकि पिता हिंदू थे। कोर्ट ने इस तर्क के जवाब में कहा कि यह किसी भी व्यक्ति का अपना निर्णय है कि वह इस्लाम या किसी और धर्म का हिस्सा बनना चाहता है। कोर्ट ने कहा कि शादी के बाद या खुद धर्म बदला जा सकता है और जरूरी नहीं कि माता-पिता से मिला धर्म ही अपनाया जाए।

जस्टिस भाटकर ने कहा, ‘विरासत का अधिकार वैकल्पिक नहीं है और जन्म के साथ ही मिल जाता है। कुछ मामलों में इसे शादी से जोड़ा जाता है। इसे ध्यान में रखकर किसी धर्म विशेष को छोड़ना या दूसरे का हिस्सा बनने को पिछले संबंधों के खत्म होने से नहीं जोड़ा जा सकता जो जन्म से ही अस्तित्व में हैं।’ उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म छोड़ने वाली एक युवती भी अपने पिता की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति में हकदार है।

कोर्ट ने अदालत ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 26 का जिक्र करते हुए कहा कि यह कानून धर्मांतरण करने वालों के बच्चों पर लागू नहीं होता, लेकिन इसमें धर्म परिवर्तन करने वालों का जिक्र नहीं है। इस आधार पर वह संपत्ति में हिस्सेदारी के लिए अयोग्य नहीं होते। महिला ने अपने पिता की संपत्ति में हिस्सा मांगते हुए फ्लैट से जुड़ी अपनी अपील 2010 में की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है।

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