Wednesday , July 18 2018

वीडियो: घोसी से बसपा प्रत्याशी अब्बास अंसारी को नहीं पता विकास किस चिड़िया का नाम?

शम्स तबरेज़, सियासत न्यूज़ ब्यूरो।

घोसी(मऊ): हाथी पर सवारी करने के बाद अंसारी बंधुओं की चांदी चमकने लगी है। बसपा में शामिल होते ही मुख्तार और उनके बड़े भाई सिबगतुल्ला का टिकट कंफर्म हो गया, सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि उनके बेटे को भी टिकट मिल गया।
मुख्तार के दो चश्मोचिराग है एक नाम उमर और दूसरे हैं अब्बास! अब्बास अंसारी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। कभी हरा गमछा पहनने वाले अंसारी बंधु अब नीले रंग में रंग चुके हैं। अब्बास अंसारी नीला गमछा गले में सजाए मऊ जिले के घोसी विधानसभा से बसपा के टिकट चुनाव लड़ रहे हैं। पहली बार चुनाव वो भी नए जोश और नए ज़ज़्बे से साथ लड़ने वाले उम्मीदवारो की आंखों में आने वाले कल की झलक दिखाई देती है, लेकिन बिना होमवर्क किए बच्चे अक्सर फेल हो जाया करते हैं चाहे स्कूल घर के बाहर हो या उनके घर में ही क्यों न हो। लेकिन बिना होमवर्क की तैयारी के चुनाव लड़ना काफी नुकसानदेह हो सकता है।
अब्बास की उम्र पच्चीस साल है। देखने में स्मार्ट लगते है। लेकिन जब उनसे जब सियासत ने सोमवार ने एक इण्टरव्यू में पूछा कि घोसी विधानसभा सीट से विकास के कौन—कौन से मुद्दे हैं तो उन्होने कहा कि मौजूदा विधायक ने पांच सालों में जो जो नहीं किया है वो काम वो करेंगे। जब सियासत ने सवाल को और भी साफ और स्पष्ट करते हुए पूछा कि कौन कौन से मुद्दे है जिस पर आपको कार्य करना है तो उन्होने कहा कि जो कार्य मौजूदा विधायक सुधाकर सिंह ने नहीं किया वो कार्य वो करेंगे। यानि अब्बास अंसारी नहीं पता कि विकास के मुद्दा! अब्बास बिना होम वर्क किए ही चुनावी मैदान में कूद पड़े है।

अब्बास पहली बार चुनाव लड़ रहे है लेकिन उनको नहीं पता कि जिस क्षेत्र से वो वोट लेने दिन रात भागदौड़ कर रहे हैं और जनता का सेवक बनने के लिए मैदान में उतर चुके है उन इलाको की समस्याएं क्या है और विकास का मुद्दा किस चिड़िया का नाम है? अब्बास अंसारी का परिचय खुद बसपा सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ में अपने प्रेस कांफ्रेंस में दिया था, लेकिन शायद मायावती ने भी नहीं सोचा होगा कि जिस चेहरे को वो घोसी से अपना उम्मीदवार बना रही हैं कैंडिडेट को घोसी की जनता की समस्या और तकलीफ का पता है भी या नहीं?
अब्बास अंसारी के ठीक उलट उनके छोटे भाई उमर अंसारी ने सियासत से बात करने के दौरान जिस समझदारी और सूझबूझ का परिचय वो काफी ज़्यादा काबिले तारीफ है। लेकिन इतना तो कन्फर्म हो गया कि बिना होम के स्कूल जाने पर बच्चे अक्सर इग्ज़ाम में फेल हो जाया करते हैं। घोसी में 4 मार्च को चुनाव होने वाला है, अब जनता ही वोटिंग के माध्यम से तय करेगी कि उसका नेता कैसा हो।
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