Thursday , April 19 2018

CAIT ने केजरीवाल से दिल्ली में हो रही सीलिंग में दखल देने की मांग की

हाल ही में दिल्ली में दोबारा दुकानों की सीलिंग शुरू होने पर गहरी चिंता जताते हुए कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल सेमांग की है की वर्ष 2006 के समय में शीला दीक्षित सरकार की तरह इस बार भी दिल्ली सरकार इस मामले की गंभीरता को देखते हुए व्यापारियों के हितों को संरक्षित करने के लिएउच्चतम न्यायलय में व्यापारियों के पैरवी करे.

कैट ने श्री केजरीवाल से यह भी मांग की है की जिन 351 सड़कों को कमर्शियल या मिक्स लैंड यूज़ घोषित करने की फाइल कई वर्षोंसे सरकार के पास अटकीपड़ी है, उन सड़कों को तुरंत अधिसूचित किया जाए.

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की नगर निगम अपने ही कानून की अवहेलना करते हुए बिना किसी नोटिस के अथवा व्यापारियों को कोई अवसर दिए बिनामॉनिटरिंग कमेटी के इशारे पर सीलिंग कर रही है. इस मांमले में दिल्ली सरकार का शहरी विकास विभाग क्यों चुप है, यह समझ से परे की बात है. सरकार को नगर निगम या केंद्रसरकार पर दोषारोपण करने की बजाय इस मामले में व्यापारियों को सीलिंग से बचाये और बिना किसी विलम्ब के 351 सड़कों को अधिसूचित करे.

दिल्ली में हो रही सीलिंग को न्याय के प्राकृतिक सिद्धांत के खिलाफ बताते हुए कहा की नगर निगम कानून जो संसद द्वारा पारित है और जिसको मानने के लिए सब बाध्य है, कोताक पर रखते हुए बिना कोई नोटिस या सुनवाई का मौका दिए बिना सीलिंग की जा रही है जो व्यापारियों के मूल अधिकार एवं प्राकृतिक न्याय के विरूद्ध है. कोई भी कार्यवाही करनेसे पहले अपनी बात कहने और अपने बचाव का मौका दिया जाना जरूरी है लेकिन सीलिंग के मामले में इसका पालन न पहले हुआ और न ही अब हो रहा है.

श्री खंडेलवाल ने याद दिलाया की वर्ष 2007 में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के सचिव ने उच्चतम न्यायालय में एक एफिडेविट देकर यह माना था की सरकार चार दशकों में केवल16 प्रतिशत व्यावसायिक क्षेत्र ही बना पायी है जबकि आवश्यकता के अनुसार शेष 84 प्रतिशत क्षत्र व्यापारियों ने अपने पैसे और अपनी मेहनत से बनाया है.

उन्होंने यह भी कहा कीवर्तमान मास्टर प्लान 2021 वर्ष 2012 से ही रिव्यु हो रहा है और आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक फाइनल नहीं हुआ है , इस से साफ़ जाहिर होता है की सरकारी अधिकारीकितने उदासीन और लापरवाह है और उनका खामियाजा व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है.

उन्होंने उम्मीद जताई है की सरकार इस मामले की गमभीरता को देखते हुए तुरंत कार्यवाही करेगी और दिल्ली के व्यापारियों को सीलिंग से बचाएगी.

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