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VIDEO- जो दुसरे को देशद्रोही कहते हैं वो खुद को देशभक्त समझते हैं- जावेद अख्तर

अकबर रोड के नाम बदले जाने के विदाद पर जावेद अख्तर ने कहा कि बिना अकबर के देश का इतिहास पूरा नहीं होता. अकबर बहुत बड़ा आदमी था. ऐसे समय में जब यूरोप में सेक्युलर को समझा जा रहा था तब अकबर ऐसा शहंशाह था जो सेक्युलरिज्म को प्रैक्टिस कर रहा था. जावेद अख्तर ने कहा कि मुगल काल में हिंदुस्तान दुनिया का सबसे अमीर देश था. उन्होंने कहा की जो दुसरे को देशद्रोही कहते हैं वो खुद को देशभक्त समझते हैं.

ताममहल के मुद्दे पर जावेद ने कहा कि ताजमहल भी मिस्र के पिरामिड की तरह आर्किटेक्चर का एक वंडर है. दिल्ली के आर्किटेक्चर पर मुगल काल की छवि है. जावेद ने कहा कि इस्लाम में चेहरा बनाने हराम है लिहाजा इस दौर में कला के छेत्र में म्यूजिक और पेंटिंग अपने शीर्ष पर पहुंचे. जावेद ने कहा कि फिल्म को इतिहास और इतिहास को फिल्म समझने की भूल नहीं करनी चाहिए.

जावेद अख्‍तर ने कहा, जिस तरह इंसान को अपनी शोहरत, फेम, पावर पर घमंड नहीं करना चाहिए, उसी तरह हमें अपने मुफलिसी और नाकामी के दिनों पर घमंड नहीं करना चाहिए. जब हमने दुख को सीने से लगा लेते हैं. हमें ये गुमान होता है कि देखो हम कहां से कहां पहुंच गए.

ये सच है कि जब मैं मुंबई आया था, तब 20 साल का भी नहीं था. स्‍टेशन उतरा तो मेरे साथ एक टीन था, जिसमें तीन जोड़ी कपड़े थे और एक जोड़ी पहने था. मेरे पास 27 नए (पैसा) थे. गनीमत है कि सिर्फ मेरे साथ लूट नहीं हुई, मेरा मर्डर नहीं हुआ, किसी बस के नीचे नहीं आया, बाकी सब मेरे साथ हुआ. सुबह खाना का इंतजाम हो जाता था तो शाम के बारे में सोचने लगता था. देखिए बलिदान कोई चॉइस नहीं है n

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