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बाबरी विध्वंस: आडवाणी और जोशी के खिलाफ फिर चल सकता है मुकदमा!

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सीबीआई की उस याचिका पर आदेश को सुरक्षित रख लिया है जिसमें साल 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में भाजपा और विहिप के आठ वरिष्ठ नेताओं पर आपराधिक षड्यंत्र के आरोप के तहत मुकदमे को फिर से शुरू करने की मांग की गई है।

न्यायालय के इस कदम से साफ़ है कि वह मुकदमे को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर सकता है। मामले के 25 साल से लंबित रहने के मद्देनजर न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष तथा न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन की पीठ ने कहा कि मामले को लखनऊ स्थानांतरित करने के लिए वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत असामान्य शक्तियों का इस्तेमाल करेगा।

न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि सुनवाई समयबद्ध तरीके से रोजाना आधार पर होगी और दो साल के भीतर ख़त्म हो जाएगी, क्योंकि उसने सभी पक्षों से मंगलवार (11 अप्रैल) तक लिखित प्रतिवेदन दाखिल करने को कहा है।

बता दें कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा मई 2010 में भाजपा तथा विहिप के आठ वरिष्ठ नेताओं को साजिश के आरोपों से मुक्त करने के फैसले के खिलाफ सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था।

बाबरी मस्जिद को गिराये जाने से पहले रामकथा कुंज के चबूतरे से भाषण देने को लेकर आडवाणी और जोशी के साथ उमा भारती, विनय कटियार (सभी भाजपा), साध्वी ऋतंभरा, आचार्य गिरिराज किशोर, अशोक सिंघल तथा विष्णु हरि डालमिया (विहिप) मुकदमे का सामना कर रहे हैं। जहां से भाषण दिया गया वह जगह मस्जिद से मात्र 200 मीटर की दूरी पर थी। किशोर तथा सिंघल का निधन हो चुका है।

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