Wednesday , June 20 2018

CM की फिर फिसली जुबान, कहा-तरक़्क़ी दोस्त खुद खाएं, दूसरे को नहीं खिलाएं

वजीरे आला जीतन राम मांझी की जुबान फिर फिसल गई। वजीरे आला ने तरक़्क़ी दोस्तों से कहा-खुद खाओ, पर दूसरे को मत खिलाओ और तरक़्क़ी पर जेहन दो। वजीरे आला यहीं नहीं रुके। कहा-कई तरह की मंसूबों का पैसा आवाम के अकाउंट में सीधे जाता है। इसलिए ख़वात

वजीरे आला जीतन राम मांझी की जुबान फिर फिसल गई। वजीरे आला ने तरक़्क़ी दोस्तों से कहा-खुद खाओ, पर दूसरे को मत खिलाओ और तरक़्क़ी पर जेहन दो। वजीरे आला यहीं नहीं रुके। कहा-कई तरह की मंसूबों का पैसा आवाम के अकाउंट में सीधे जाता है। इसलिए ख़वातीन के अकाउंट खोलने पर ज्यादा जेहन दिया जा रहा है, क्योंकि ख़वातीन घर की मसायलों से रूबरू होती रहती हैं। मर्दों के अकाउंट में पैसा डालने पर वो दारू में उड़ा देते हैं और घर की हालत बदतर ही रह जाती है। मांझी बुध को बनमनखी में शहरी इस्तकबाल तकरीब में बोल रहे थे।

‘दारू को दवा के रूप में पिएं’

बीते इतवार को ही दानापुर में महादलितों के दरमियान बासगीत का पर्चा बांटने आए सीएम जीतन राम मांझी ने तबके के लोगों से कहा था कि दारू को दवा के रूप में पिएं। नशे की वजह महादलित लोग न तो अपने बच्चों का ध्यान रख पाते हैं, न ही ज़िंदगी को बेहतर कर पाते हैं। पीना ही है तो शराब को दवा के तौर में थोड़ी-थोड़ी पियो। रूपसपुर नहर वाकेय चुल्हाईचक मुसहरी में दलित हक़ मंच की तरफ से मुनक्कीद तकरीब में सीएम ने कहा था कि महरूम तबके के लोगों को दीगर तबकों से सबक लेते हुए आगे बढ़ना होगा।

‘चूहा खाना खराब बात नहीं’

इससे कुछ दिनों पहले ही सीएम की जुबान एक बार फिर लड़खड़ाई थी और उन्होंने सैलाब मुतासीरों के चूहा खाकर जिंदा रहने की खबर पर कहा था, ‘चूहा मारकर खाना खराब बात नहीं है। मैं भी चूहा खाता था। आज भी मिल जाए तो परहेज नहीं है।’ ओपोजीशन ने जीतन के इस बयान की तनकीद की। ओपोजीशन का कहना था कि सैलाब मुतासीरों को मजबूरी में चूहे खाने पड़ रहे हैं। इसलिए जीतन का बयान कबीले एतराज़ है। दरअसल, जीतन मुसहर ज़ात से ताल्लुक रखते हैं। इस तबके के लोग आज भी चूहे खाते हैं।

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