अर्थव्यवस्था पर कोरोना का कहर, 2 ट्रिलियन डालर तक हो सकता है नुकसान : यूएन

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CoViD-19 यानी Coronavirus का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। अमेरिकी और जापानी शेयर बाजारों के साथ ही भारतीय बाजार में भी लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। Coronavirus की शुरुआत चीन से हुई थी। बेहद खतरनाक यह संक्रामक बीमारी अब तक 57 देशों में फैल चुकी है जहां 3000 लोगों की मौत हो गई है और 1 लाख से ज्यादा लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि यदि इस बीमारी पर काबू नहीं किया गया तो कई देशों की अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी। ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर है कि कोरोना वायरस किस सीमा तक फैलता है और सरकारें इन्हें रोकने में किस हद तक कामयाब हो पाती हैं। बीमारी बेकाबू हुई, तो दुनिया की जीडीपी के 5 फीसदी के बराबर यानी 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हो सकता है।

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कोरोना वायरस के कारण अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान पहुंचेगा, यह इस पर निर्भर करता है कि यह बीमारी कितने समय तक असर दिखाती है। जिस तरह यह चीन में लंबे समय से टिकी है, यदि ऐसा बाकी देशों में होता है तो नुकसान अधिक होगा। कंज्युमर गुड्स और एनर्जी की मांग घटेगी। प्रॉडक्शन रुक जाएगा, फैक्टरियां बंद हो जाएंगी। दुकानों तक सामान नहीं पहुंचेगा तो कीमतें बढ़ जाएंगी।

इन्हीं आशंकाओं को देखते हुए अमेरिका और चीन के साथ ही फिलिपिंस जैसे देशों ने रेट कट की घोषणा कर दी है। अमेरिका ने तो दशक के सबसे बड़े इंटरेस्ट कट का ऐलान किया है, वहीं चीन ने भारी मात्रा में लिक्विडिटी बाजार में फ्लो की है, ताकि बैंकों और कर्ज लेने वालों को आसानी हो। इसी तरह जापान भी तकनीकी रूप से मंदी की चपेट में जा सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर

भारत की अर्थव्यवस्था मंदी से जूझ रही है और सुधार के मालूमी संकेत भी दिखा रही है, लेकिन यह बीमारी फैलती है तो कई सेक्टर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उम्मीद की जा रही है कि वित्तीय वर्ष के आखिरी महीने में ग्रोथ तेजी पकड़ेगी। मैन्युफैक्चरिंग और ट्रैक्टर की बिक्री का बेहतर डाटा सामने आया है, लेकिन कोरोना के कारण बड़ा खतरा अब भी मंडरा रहा है।

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कोरोना वायरस को लेकर शेयर बाजार कितना आशंकित है, अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिन कंपनियों के शेयर कुछ समय पहले तक ऑल टाइम हाई पर थे, वो अब 10 फीसदी तक गिर गए हैं। भारत की कई कंपनियां कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। ऐसे में सप्लाय साइड बाधित होने आशंका तो ही है, लेकिन यदि चीन में हालात काबू में आते हैं तो अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी पर लौट भी सकती है। यह भी साफ है कि भारत में जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, वायरस का असर कम होगा।

इन सेक्टर्स पर ज्यादा पड़ेगा असर

भारत में कोरोना के कारण जिन सेक्टर्स पर ज्यादा असर पड़ सकता है, उनमें शामिल हैं – टैक्सटाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो, फार्मा और शिपिंग। सप्लाय चेन बाधित होती है तो इनसे जुड़ी इंडस्ट्री और मार्केट पर अभी असर पड़ सकता है।

ग्राहकों की खर्च करने की क्षमता पर पड़ेगा असर

CoVid -19 के कारण ग्राहकों के खर्च करने की आदत पर असर पड़ सकता है। पहले देखा जा चुका है कि ऐसे माहौल में लोग सार्वजनिक स्थानों, मॉल्स, मूवी, होटल आदि में जाने से बचते हैं। इससे उनका खर्च तो कम होगा, लेकिन इन सेक्टर्स की हालत खराब हो जाएगी।

कोरोना का दूसरा असर यह है कि घरों में दूसरे खर्च बढ़ जाएंगे जैसे फूड प्रोडक्ट्स, क्लीनिंग प्रोडक्ट्स और पर्सनल केयर (हैंड वाश, फेसियल टिश्यूज, आदि)। इसी दौरान ऑनलाइन खरीदारी घटेगी।

चीन विभिन्न भारतीय ऑटो निर्माताओं को लगभग 10% -30% कच्चे माल की आपूर्ति करता है। हालांकि अधिकांश ऑटो कंपनियों का कहना है कि उन्होंने मौजूदा दौर में सप्लाय की कमी से निपटने का बंदोबस्त कर रखा है। अच्छी बात यह है कि वुहान से बाहर के इंडस्ट्रीयल हब ने काम करना शुरू कर दिया है। इसलिए ऑटो सेक्टर पर अभी असर नहीं पड़ेगा।

दुनियाभर की फार्मा कंपनियों को कच्चा माल चीन से ही मिलता है। इसलिए दुनियाभर की कंपनियां प्रभावित हो रही हैं। भारत के दवा निर्माता 70 फीसदी कच्चा माल चीन से लेते हैं। कोराना का शुरुआती दौर निकल जाने के बाद चीन में अब अधिकांश यूनिट्स ने काम करना शुरू कर दिया है। फिर भी भारत में अभी कई कंपनियों में दवाओं का निर्माण प्रभावित ही है। यही कारण है कि सरकार ने बीते दिनों 26 फार्मास्युटिकल दवाओं के निर्यात पर रोक लगा दी। अमेरिकी की 90 फीसदी दवा कंपनियों में काम प्रभावित हुआ है। यहां भी चीन से कच्चा माल आता है। धातु के साथ ही फार्मा ऐसा सेक्टर रहेगा, जिस पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

रुक जाएंगे आईटी के प्रोजेक्ट

कोरोना वायरस के कारण लोगों की आवाजाही पर असर पड़ा तो सबसे ज्यादा नुकसान आईटी सेक्टर को होगा। कोर आईटी सेक्टर के की प्रोजेक्ट थम जाएंगे। नए आईटी प्रोजेक्ट्स में भी देरी होगी। वहीं दुनियाभर में चीन से बने आईटी प्रोडक्ट्स जाते हैं। इस पर भी नकारात्मक असर पड़़ रहा है। Apple के फोन चीन में असेंबल हो रहे हैं और कंपनी अभी से चिंता जता चुकी है।

यदि संकट बना रहा तो चीन की बड़ी कंपनियां वहां से हट जाएंगी और थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों का रुख करेंगी। असेंबली मॉडल वाली कंपनियों के लिए ऐसा करना आसान होगा, लेकिन कोर मैन्युफैक्चरियंग कंपनियों के लिए ऐसा बदलाव आसान नहीं होगा।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि CoViD-19 के कारण देश दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। हालांकि, लंबी अवधि के दृष्टिकोण में, एसआईपी के आधार पर इक्विटी में निवेश अच्छा होगा। वर्तमान परिदृश्य में, इक्विटी में 30% निवेश करना अच्छा होगा जबकि 30% कमोटिडी में आवंटित किया जा सकता है। बाकी 40% निवेश को संप्रभु संपत्तियों में उस समय तक रखा जा सकता है जब तक कि बाजारों में उतार-चढ़ाव कम नहीं हो जाता।

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