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इस बजट में सरकार ने दलित और आदिवासियों के लिए योजनाएं की कम

सांकेतिक तस्वीर

नई दिल्ली: दलित मानवाधिकार के लिए राष्ट्रीय अभियान (एनसीडीएचआर) ने कहा है कि 2016-17 के लिए केंद्रीय बजट प्रस्तावों में अनुसूचित जाति उप योजना और जनजातीय उप योजना के तहत कुल आवंटन बेहद खराब था।

पिछले साल स्टार्ट-अप प्रोग्राम के तहत अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग 500-500 करोड़ रुपए का बजट में आवंटन किया गया था, पर उसमें से केवल 500 करोड़ रुपए ही खर्च किए जा सके हैं।

बजट प्रस्तावों के तहत अनुसूचित जाति के लिए आवंटन केवल 7.6% है, जब एससीएसपी बजट के तहत की गई राशि 16.8% होनी चाहिए, जो टीएसपी के तहत 91,301 और 8.6% की राशि के बराबर होनी चाहिए, जो कि 42,300 करोड़ रुपए के बराबर होनी चाहिए।
एनसीडीएचआर ने इसकी निंदा की है।
दलितों और आदिवासियों के लिए योजनाएं भी कम की गईं है। दलितों के लिए योजनाएं घटाकर 256 और आदिवासियों के लिए 261 कर दी गई हैं, जबकि वर्ष 2016-17 में इनके लिए योजनाओं की संख्या क्रमश: 294 और 307 थीं. इस साल अनुसूचित जातियों के लिए 11 और अनु.जनजातियों के लिए 8 नई योजनाएं लागू की जानी हैं।

एनसीडीएचआर से जुड़े एन पॉल दिवाकर कहते हैं कि वास्तव में एससी/एसटी के लिए कुल योजनाओं की 51 फीसदी फंडिंग सामान्य योजनाओं के साथ/सीधे तौर पर विलय कर दी गई है। उनके मुताबिक शेड्यूल कास्ट सब-प्लान (एससीएसपी) और ट्राइबल सब-प्लान (टीएसपी) के लिए बजटीय आवंटन को क्रमश: ‘अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए आवंटन’ (अंडर स्टेटमेन्ट 10ए) और अनूसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए आवंटन (अंडर स्टेटमेन्ट 10बी) में रखा गया है।

 

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