Friday , April 20 2018

UP: दलित दुल्हे को ठकुरों के इलाके से बारात निकाले जाने की दी गयी अनुमति, पुलिस ने लगाई थी रोक!

उत्तर प्रदेश के कासगंज में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद यूपी पुलिस ने यहां के एक दलित परिवार की शादी में बारात निकालने पर रोक लगाई थी। रोक के बाद यहां विवाद पैदा हो गया था। दलित दूल्हे ने पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाया।

यहां तक कि उसने यूपी पुलिस के खिलाफ हाई कोर्ट इलाहाबाद में याचिका भी दायर की और उसने सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात कही थी। अब आखिरकार दूल्हे को ठाकुरों के इलाके से बारात निकाले जाने की अनुमति दे दी गई है।

संजय जाटव की शादी कासगंज जिले के निजामपुर में रहने वाली शीतल के साथ 30 अप्रैल को होनी है। संजय ने कहा था कि वह गांव निजामपुर में ठाकुरों के घरों के सामने से ले बारात निकालेगा। ठाकुर समुदाय के लोग इससे सहमत नहीं थे।

हालांकि, कासगंज जिला प्रशासन ने 800 मीटर रास्ते का मैप बनाकर किसी तनाव से बचने का तरीका निकाला था, लेकिन संजय इसके खिलाफ हाई कोर्ट गए थे।

30 मार्च को हाई कोर्ट ने संजय जाटव की याचिका को खारिज करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस से मामले में उचित कार्रवाई करने को कहा था। हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद संजय ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने ठाकुरों और उसके बीच समझौता कराया। ठाकुरों ने संजय को गांव में कहीं से भी बारात निकालने की सहमति दे दी है।

ठाकुरों और दलित संजय के बीच पुलिस ने बैठक तब कराई है जब एक दलित सांसद ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दलितों के साथ यूपी में खराब व्यवहार होने की बात कही थी।

बैठक में पुलिस ने ठाकुरों और दलित के बीच समझौता कराया। बैठक में विभिन्न विकल्पों पर बात हुई। अंतिम में समझौता इस बात पर हुआ कि बारात में कोई राजनीतिक व्यक्ति शामिल नहीं होगा, किसी भी शस्त्र या असलहों का प्रदर्शन नहीं होगा, कोई शराब नहीं पीएगा। साउंड सिस्टम में किसी भी तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

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