Wednesday , June 20 2018

शिया मुस्लिमों के साथ रोजा इफ्तार वाला दारुल उलूम देवबंद का फतवा फ़र्ज़ी

नई दिल्ली। हाल ही में एक समाचार सोशल मीडिया और कुछ प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुआ कि दारुल उलूम देवबंद ने एक फतवा दिया है कि किसी सुन्नी को शिया मुसलमानों द्वारा आयोजित इफ्तार में भाग नहीं लेना चाहिए। यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई और इसकी आलोचना हुई।

एक उपयोगकर्ता ने ट्वीट किया, ‘मैं एक सुन्नी मुसलमान हूं और मैं अपने शिया भाई के घर जाऊंगा और इफ्तार पार्टी में शामिल हो जाऊंगा। हालांकि, फतवे की असलियत के बारे में जल्द ही संदेह उठने लगे। कई देवबंद विद्वानों से बात करते हुए ‘मुस्लिम मिरर’ ने पाया कि हर कोई ऐसे फतवा से अनजान था। दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट पर ऐसा कोई फतवा उपलब्ध नहीं है।

इस मुद्दे के बारे में बात करते हुए सुन्नी मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा, ‘यह पूरी तरह फ़र्ज़ी फतवा है। दारुल उलूम देवबंद ने इस प्रकार का फतवा कभी जारी नहीं किया और यह हमें बदनाम करने और हमारी एकता को तोड़ने की साजिश है। उन्होंने कहा, ‘कुछ दुश्मन सिर्फ अफवाहें फैला रहे हैं। मैं सभी मुस्लिमों से अपील करता हूं कि वे इस शरारत को अनदेखा करें।

इसी बीच, शिया और सुन्नी मुस्लिमों ने दिल्ली में एक बैठक आयोजित की और लोगों से अफवाहों पर ध्यान देने के लिए कहा। शिया मौलाना यासुब अब्बास ने फतवा कोवे को फर्जी बताया और कहा कि यह शांति भंग करने की साजिश है। उन्होंने कहा, दारुल उलूम को इस मामले की जांच करनी चाहिए और दोषी को दंडित किया जाना चाहिए।

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