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नाबालिगों से रेप पर मौत की सजा, आज लग सकती है कैबिनेट की मुहर

मोदी सरकार  नाबालिग से रेप मामले में मौत की सजा के प्रावधान के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है. शनिवार को कैबिनेट की बैठक में ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस’ यानी पॉक्सो एक्ट में संशोधन को मंजूरी मिल सकता है, जिसके बाद 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के दोषियों को मौत की सजा दिए जाने का रास्ता साफ हो जाएगा.

जम्मू के कठुआ और उत्तर प्रदेश के एटा में नाबालिग बच्चियों के साथ रेप की घटनाओं ने देश को झकझोर कर रख दिया है, जिसके बाद सरकार नाबालिग बच्चियों से रेप करने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करने की तैयारी में है. उम्मीद की जा रही है कि शनिवार को कैबिनेट की बैठक में पॉक्सो एक्ट में संशोधन को मंजूरी मिल जाएगी, जिसके बाद 12 साल से कम की बच्चियों के बलात्कार के दोषियों को मौत की सजा दिए जाने का रास्ता साफ हो जाएगा.

महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने हाल में ही कहा था कि वो कठुआ और हाल में हुई दूसरी बलात्कार की घटनाओं से बहुत दुखी हैं और उनका मंत्रालय बहुत जल्द ही पॉक्सो एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने पेश करेगा. फिलहाल इस कानून में दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान नहीं है. कैबिनेट की बैठक के एक दिन पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका के जवाब में एक पत्र देकर कहा है कि वह पॉक्सो एक्ट में संशोधन करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है, जिसके तहत 12 साल से कम की बच्चियों के साथ बलात्कार के लिए फांसी की सजा का प्रावधान होगा.

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी. कठुआ में आठ साल की मासूम बच्ची के साथ बलात्कार और उसके बाद हत्या की घटना के बाद से ऐसे अपराध  के लिए फांसी की सजा की मांग उठ रही है. केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने जब इस प्रस्ताव के बारे में कहा तो उन्हें हर तरफ से इसको लेकर समर्थन मिला. नाबालिगों से बलात्कार की बढ़ती घटनाओं को लेकर राहुल गांधी ने भी ट्वीट करके प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर खींचा था. राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में कहा था कि सिर्फ 2016 में ही नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार के 19,675 मामले सामने आए.

उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री को इन मामलों में तेजी से सुनवाई करके पीड़ितों को न्याय दिलाने का उपाय करना चाहिए. दो दिन पहले ही मेनका गांधी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर यौन उत्पीड़न से निपटने के लिए स्पेशल सेल बनाने को कहा था. मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल को लिखे गए पत्र में मेनका गांधी ने कहा था कि ऐसे मामलों की जांच और सबूत इकट्ठा करने के लिए पुलिस के लोगों की विशेष ट्रेनिंग होनी चाहिए और राज्यों में फॉरेंसिक लैब की स्थापना होनी चाहिए, जिससे दोषी बच न सके और उन्हें तेजी से सजा दिलाई जा सके.

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