Wednesday , September 26 2018

राजस्थान : महिला को दलित से प्यार की कीमत मौत से चुकानी पड़ी

भीलवाड़ा। उसने गांव के जिस आदमी से उसने प्यार किया वह दलित था। 44 वर्षीय सोहनी देवी ने नारायण बालाई के साथ रहने का फैसला किया, जो एक दलित था जो 10 वर्ष की उम्र में छोटी थी। देवी विधवा और बालाई विधुर था। राजस्थान के भीलवाड़ा में सुवाना गांव में वे पांच साल तक रहे।

4 फरवरी को जयपुर में अस्पताल में तपेदिक से उसकी मौत हो गई। उनकी मृत्यु की खबर फैल गई, जाट वर्चस्व वाले गांव के वृद्ध ने कहा कि कोई भी उसके शरीर को नहीं छुएगा। बालाई एक टैक्सी में उसके शव के साथ सुबह गांव लौटे। शव को घर में ले जाने के लिए कोई उसको सहारा देने के लिए आगे नहीं आया। उन्होंने देवी को अपनी बाहों में लिया और धीरे-धीरे दोमंजिला घर पर रख दिया।

उसने अपने दोस्तों को फोन करना शुरू कर दिया। एक को छोड़कर कोई भी नहीं आया। ऐसा नहीं था कि लोग नहीं थे लेकिन देवी के शव की अंत्येष्टि की व्यवस्था करने के लिए वह संघर्ष करता रहा। लोगों ने सुझाव दिया कि बालाई पुलिस से मदद ले लो। उसने ऐसा किया तो सदर पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस अधिकारी यशदीप भल्ला ने कहा कि मैं क्या कर सकता था? यह कानून-व्यवस्था की स्थिति नहीं थी। मैं ग्रामीणों को अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता था।

फिर उन्होंने शव को ले जाने के लिए एक एम्बुलेंस बुलाई ताकि अंतिम संस्कार स्थल पर जा सके। लगभग 5 बजे देवी का अंतिम संस्कार किया गया। उनके एक दोस्त रामचंद्र अन्य हरिजन कर्मचारियों के साथ संस्कार स्थल पर थे। देवी की मृत्यु के बाद बालाई ने अपना घर बंद कर दिया और गांव में अपने पिता के घर चले गए। बालाई ने कहा, ‘हम दोनों को घर सजाने से प्यार था। जब भी हम भीलवाड़ा शहर जाते हैं, हम पोस्टर और फूलों को खरीदते थे।

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