देश मे विरोधी तंत्र ज्यादा ताकत के साथ सक्रिय हो गया है- पीएम मोदी

देश मे विरोधी तंत्र ज्यादा ताकत के साथ सक्रिय हो गया है- पीएम मोदी

भाजपा की संसदीय दल की बैठक आयोजित की गई। संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि दल हित से बड़ा देश होता है और अगर मैं भारत माता की जय बोलता हूं तो मेरे ऊपर सवाल उठाया जा रहा है।

 

खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, हमको देश हित की लड़ाई लड़नी है और हमको देशहित को बड़ा रखना है दल हित को पीछे रखना है। आपको बताते जाए कि यह बयान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के भारत माता की जय बोलने वाले बयान को लेकर दिया गया है।

 

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर इशारों में तंज कसते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री को भारत माता की जय बोलने में बू आती है।

 

ठीक ऐसा ही वातावरण देश की आजादी के समय था, जब कुछ लोगों को वंदे मातरम बोलने में बू आती थी। संसदीय दल की बैठक में अपने 15 मिनट की भाषण में मोदी भावुक हो गए।

 

उन्होंने कहा, “कुछ लोग दल के लिए जीते हैं, हम देश के लिए जीते हैं। हमारी पार्टी सबका साथ, सबका विकास पर चलती है। प्रधानमंत्री ने हालांकि दोहराया कि विकास के लिये देश में शांति और सद्भभाव जरूरी है।

 

दिल्ली में हाल ही में हुई हिंसा की तरफ इशारा करते हुये पीएम ने कहा आज कल देश मे विरोधी तंत्र ज्यादा ताकत के साथ सक्रिय हो गया है ।

 

भाजपा संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने सांसदों को नसीहत देते हुए कहा कि आप पर सवा सौ करोड़ लोगों का भार है। आप बहुत व्यस्त रहते हैं, लेकिन फिर भी कुछ समय देश के लिए निकालिए और देश के कल्याण में काम कीजिए।

 

आपको बताते जाए कि विपक्षी पार्टियां आज फिर दिल्ली दंगों को लेकर संसद के दोनों सदनों में मामले को उठाएंगी। आम आदमी के सांसद संजय सिंह का कहना है कि सरकार दिल्ली दंगों पर चर्चा से क्यों भाग रही है, जब तक इस मुद्दे पर चर्चा नहीं होती इस मुद्दे को हम उठाते रहेंगे। वहीं कांग्रेस भी चाहती है कि सरकार दिल्ली दंगों के मामले में चर्चा करें और प्रधानमंत्री को इस पर जवाब देना होगा।

 

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने दिल्ली हिंसा को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि भड़काऊ भाषण देने का काम बीजेपी के नेताओं ने किया है, जिससे माहौल खराब हुआ और दिल्ली दंगों के पीछे केंद्र सरकार खुद थी।

 

इस बीच राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दलों ने सरकार से संसद में बहस कराने की मांग उठा रही हैं।

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