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यासीन भटकल और IM के 4 सदस्यों ने जज बदलने की मांग रखी, भेदभाव का लगाया आरोप

हैदराबाद: इंडियन मुजाहिद्दीन के यासीन भटकल और चार अन्य सदस्यों ने मेट्रोपोलिटन सेशन जज को एक पत्र लिखकर कहा है कि न अदालत आपकी राज्य है और न हम आपकी प्रजा कि आप हमारे साथ गुलामों जैसा बर्ताव करें।

अंग्रेजी अखबार डेक्कन क्रोनिकल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक 7 जून 2016 को यानि कि फैसले से छह महीने पहले लिखे गए इस पत्र के मुताबिक़ जज आंध्र प्रदेश से थे और बचाव पक्ष का वकील तेलंगाना से। इसलिए उन्हें शक था कि क्षेत्रीयता के आधार पर वे फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा पत्र के ज़रिए आरोपियों और वकीलों के प्रति जज के कठोर व्यवहार का भी पता चला है।

अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट में आरआर जिला और सत्र न्यायाधीश ने दावा किया था कि जज पक्षपाती थे इसलिए आरोपियों ने नए न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग की और कहा कि वे नई नियुक्ति के बाद ही तर्क प्रस्तुत करेंगे।

पत्र के मुताबिक उन्होंने अपने वकीलों से इस जज के सामने वाद-विवाद करने से मना भी किया था क्योंकि उन्हें शक था कि वे उचित फैसले नहीं देंगे।

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया था कि पुलिस पर यातनाओं की शिकायत के बावजूद न्यायाधीश ने इसे नहीं रोका और दावा किया कि दिलसुखनगर विस्फोटों के परीक्षण के दौरान न्यायाधीश को विशेष सुरक्षा प्रदान की गई थी।

बता दें कि अदालत ने कर्नाटक से आईएस के कामकाज यासीन भटकल उर्फ मोहम्मद अहमद सिद्दीबाप्पा, यूपी के असदुल्ला अख्तर, पाकिस्तान के ज़िया-उर-रहमान उर्फ वाकास, बिहार के तहसीन अख्तर और महाराष्ट्र से ऐजाज शेख को दो विस्फोटों में दोषी ठहराया था।वहीँ उनके खिलाफ हत्या, साजिश, हत्या का प्रयास और अन्य आपराधिक आरोपों के साथ हत्या का आरोप भी है।

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