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आरएसएस के देवेंद्र गुप्ता अजमेर विस्फोट में दोषी जबकि मक्का मस्जिद मामले में बरी

मक्का मस्जिद विस्फोट मामले और अजमेर शरीफ दरगाह विस्फोट मामले में ‘नंबर वन’ आरोपी के रूप में देवेंद्र गुप्ता का नाम था। पहले मामले में गुप्ता को सोमवार को बरी कर दिया गया। हालांकि दूसरे मामले में सालभर पहले गुप्ता को दोषी करार दिया गया था। दोनों जगहों पर धमाके 2007 में पांच महीनों के अंतराल पर किए गए थे। नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी ने कहा था कि एक ही साजिश के तहत ये धमाके किए गए थे और इन्हें अंजाम देने का तरीका भी मिलता-जुलता था।

एनआईए ने सीएफएसएल से मिले सबूत के आधार पर दावा किया था कि दोनों मामलों में धमाके एक जैसे थे और दोनों में बम विस्फोट के लिए सिम कार्ड वाले मोबाइल का टाइमर के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इस विसंगति से हालांकि देश में दक्षिणपंथी टेरर मॉड्यूल की मौजूदगी होने की आशंका खत्म नहीं होती, लेकिन अजमेर और हैदराबाद, दोनों मामलों में अदालतों ने एनआईए के प्रमुख सबूत पर भरोसा नहीं किया।

यह प्रमुख सबूत था स्वामी असीमानंद का ज्यूडिशियल कन्फेशन। दोनों धमाके होने के करीब चार साल बाद ये मामले एनआईए के पास आए थे। एनआईए ने तबसे जो कुछ भी दूसरे सबूत जुटाए, उनमें मुख्य हिस्सा असीमानंद का बयान ही था। एनआईए का गठन साल 2009 में किया गया था। हालांकि 2011 में जाकर केंद्र सरकार ने इन दोनों मामलों की जांच एनआईए को देने का फैसला किया।

उससे पहले 19 नवंबर 2010 को असीमानंद को हरिद्वार से अरेस्ट कर लिया गया था और असीमानंद के कथित ज्यूडिशियल कन्फेशन से यह बात सामने आई थी कि 2006 से 2008 के बीच हुए अजमेर, मक्का मस्जिद, मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामलों में दक्षिणपंथी आतंकवादी गुटों का हाथ था। साल 2011 तक अजमेर केस की जांच राजस्थान पुलिस के पास थी, समझौता केस की जांच हरियाणा पुलिस कर रही थी और मक्का मस्जिद केस की जांच सीबीआई के जिम्मे थी। सीबीआई ने देवेंद्र गुप्ता और असीमानंद को अरेस्ट किया था।

मक्का मस्जिद केस एनआईए के लिए बड़ी उलझन का सबब बन गया है क्योंकि जिस शख्स राजेंद्र चौधरी पर उसने 9 लोगों की जान लेने वाला बम धमाका करने का आरोप लगाया था, उसे भी बरी कर दिया गया है। एनआईए की जांच के कई पहलू अनुत्तरित हैं। मसलन, इसने मक्का मस्जिद केस में आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार पर आरोप क्यों नहीं लगाया, जबकि अपनी चार्जशीट में उसने कहा था कि इंद्रेश कुमार ने बम धमाकों के लिए पैसे का इंतजाम किया था। सीबीआई ने इस केस में इंद्रेश से पूछताछ की थी, लेकिन एनआईए ने दोनों मामलों में इंद्रेश को क्लीन चिट दे दी थी।

असीमानंद को जब समझौता, अजमेर और मक्का मस्जिद मामलों में निचली अदालतों से जमानत मिली तो एनआईए ने ऐसे संवेदनशील मामलों में बेल रद्द कराने के लिए ऊपरी अदालतों में अपील नहीं की। हालांकि एनआईए असीमानंद के इकबालिया बयान पर दांव लगाती रही। एनआईए का जोर असीमानंद के इस दावे पर भी था कि हैदराबाद में मक्का मस्जिद में धमाका इसलिए किया गया क्योंकि ‘हैदराबाद को सबक सिखाना जरूरी था। हैदराबाद के निजाम ने आजादी के वक्त भारत छोड़कर पाकिस्तान जाने का निर्णय किया था।’

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