जब टीपू सुल्तान अपनी जान की बाजी लगाकर अंग्रेजों से लड़ रहे थे, तब हिंदू राजा क्या कर रहे थे?

जब टीपू सुल्तान अपनी जान की बाजी लगाकर अंग्रेजों से लड़ रहे थे, तब हिंदू राजा क्या कर रहे थे?
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कर्नाटक सरकार 2015 से इस टीपू जयंती को मनाती आ रही है। टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों से चार युद्ध लड़े थे, टीपू ही पहले ऐसे राजा थे जिन्होंने मिसाईल का इस्तेमाल किया था। टीपू जब तक जिंदा रहे अंग्रेजों से लड़ते रहे और आखिरकार लड़ते लड़ते शहीद हो गये।

ब्रिटिश वार म्यूजियम ने टीपू सुल्तान को ब्रिटिश साम्राज्य के सबसे बड़े दुश्मनों की लिस्ट में रखा है. भारत में जब अंग्रेज अपना राज कायम कर रहे थे उन्हें सबसे बड़ी चुनौती इसी शेर से मिली थी. अंग्रेज इतिहासकार टीपू का नाम इज्जत से लेते हैं,

सवाल उठता है कि जब टीपू सुल्तान अपनी जान की बाजी लगाकर अंग्रेजों से पंजा भिड़ाए हुए थे, तब हमारे हिंदू राजा महाराजा लोग क्या कर रहे थे?

इसलिए इतिहास को ज्यादा मत खंगालिए. शर्म आएगी.

फ्रांसिसी फिलॉसफर अर्नेस्ट रेनॉन ने अपने ऐतिहासिक भाषण ‘ What is a Nation’ में भूलने की प्रक्रिया को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य माना है.

इतिहास बहुत सारा दर्द और अपमान दे सकता है. उसका बोझ उठाकर राष्ट्र बनना मुश्किल होता है.

इतिहास में आपका गर्व किसी का अपमान हो सकता है.

मुसलमानों को भी भूलना होगा कि उन्होंने भारत के बड़े हिस्से पर एक समय राज किया था. सबको कुछ न कुछ भूलना होगा. मिलकर रहना तभी आएगा.

याददाश्त बुरी चीज है,. राष्ट्र निर्माण में बहुत बड़ी बाधा. किसने कब किसको हराया, किसको मारा, किसको लूटा, यह सब याद रखकर हम एक राष्ट्र के नागरिक कैसे बन सकते हैं?वैसे नागरिक, जिनके सुख, दुख और सपने एक हों?

भूल जाना बहुत जरूरी है. बहुत ही जरूरी.

   दिलीप सी. मंडल

(लेखक इंडिया टूडे के पूर्व संपादक हैं. यह टिप्पणी उनकी फेसबुक बाल से ली गई है)

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