Thursday , September 20 2018

बाबासाहब अंबेडकर और महात्मा गांधी : साधुवाद की मिसाल

भीमराव अम्बेडकर और महात्मा गांधी के बीच प्रतियोगिता में वह व्यक्ति वास्तव में महात्मा था जो एक व्यक्ति से लड़ने का नाटक करता था। ऐसा नहीं है कि हम अम्बेडकर को नहीं समझते हैं।

महात्मा गांधी अलग नहीं थे। अम्बेडकर का डर उचित है, इस्लाम, साम्यवाद, हिंदू धर्म, इतिहास, धर्मशास्त्र, विज्ञान, अर्थशास्त्र, राजनीति, समाज, साहित्य, कानून, विदेश नीति, शिक्षा, और पत्रकारिता पर आधारित हर विषय पर एक व्यक्ति इतना आधिकारिक कैसे हो सकता है।

यह कहने का कोई और तरीका नहीं है कि महात्मा गांधी अम्बेडकर की बुद्धि से डर गए थे। आखिरकार, महानता का न्याय नहीं किया जाता है। गांधी ने इसे सही तरीके से गलत पाया, अम्बेडकर को यह सही मिला जो इस लेखक की राय में लगभग हमेशा ही था।

गांधी एक दयालु व्यक्ति थे, वह एक अच्छे इंसान थे। अम्बेडकर के लिए कुछ भी आसान नहीं था, कम से कम उनकी सभी प्रतिभायें। अम्बेडकर के अलावा गांधीजी का आकलन करने वाले किसी और ने कभी भी उसके पहले या उसके बाद की हिम्मत नहीं की थी। ऐसा दिखाया जाता है मानो हर मुद्दे पर दोनों में तीखा विरोध था जबकि एक तटस्थ पड़ताल करने पर सच्चाई कुछ और ही दिखाई देती है।

और जैसा कि उम्मीद कर सकते हैं कि जब महात्मा गांधी जैसा एक बूढ़ा व्यक्ति इस रुखाई पर उतरा हो, तो अंबेडकर जैसे सुतीक्ष्ण युवा का जवाब कैसा होता। उन्होंने भी थोड़े तंज के साथ ही जवाब दिया कि आपने यहां मुझे आपकी अपनी बात सुनने के लिए बुलाया था. कृपा करके वह कहिए जो आपको कहना है, या आप चाहें तो मुझसे कोई सवाल पूछें और फिर मैं उसका जवाब दूं।

इसके जवाब में गांधी का स्वर अप्रत्याशित रूप से और भी तल्ख हो चुका था। उन्होंने कहा- ‘मैं समझता हूं कि आपको मेरे और कांग्रेस के खिलाफ कुछ शिकायते हैं. लेकिन मैं आपको बताऊं कि अपने स्कूल के दिनों से ही मैं अस्पृश्यों की समस्या बारे में सोचता रहा हूं।

तब तो आपका जन्म भी नहीं हुआ था। आपको शायद यह भी मालूम होगा कि इसे कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल कराने के लिए मुझे कितनी कोशिश करनी पड़ी और यह सचमुच आश्चर्य की बात है कि आप जैसे लोग मेरा और कांग्रेस का विरोध करते हैं। यदि आपको अपने रुख का औचित्य साबित करने के लिए कुछ कहना है तो खुलकर कहिए।

जवाब में डॉ अंबेडकर ने कहा, ‘महात्माजी, यह सच है कि जब आपने अछूतों की समस्या के बारे में सोचना शुरू किया तब मेरा जन्म भी नहीं हुआ था। सभी बूढ़े और बुजुर्ग लोग हमेशा अपनी उम्र की दुहाई देते हैं। यह भी सत्य है कि आपके कारण ही कांग्रेस ने इस समस्या को मान्यता दी लेकिन मैं आपसे कहूंगा कि कांग्रेस ने इस समस्या को औपचारिक मान्यता देने के अलावा कुछ भी नहीं किया।

(साभार : SWARAJYA)

TOPPOPULARRECENT