क्या आप जानते हैं, शादियों की मंनत मांगने के लिए भी आ रहे हैं कांवड़ीयां?

क्या आप जानते हैं, शादियों की मंनत मांगने के लिए भी आ रहे हैं कांवड़ीयां?

हरिद्वार बम कांवड़ मेला शबाब पर है। 9 अगस्त को शिवरात्रि तक यह मेला इसी तरह भीड़-भाड़ से सराबोर होगा। सावन के महीने को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। यही कारण है कि इस दौरान शिव की प्रिय कांवड़ यात्रा निकाली जाती है।

यात्रा के दौरान कई श्रद्धालु मन्नतें मांगने यहां आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कुछ लोग तो शादी की मन्नत मांगने आ रहे हैं।

कांवड़ यात्रा से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। सबसे पहला कांवड़िया भगवान राम को माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने सुल्तानगंज से कांवड़ में गंगाजल लाकर बाबाधाम के शिवलिंग का जलाभिषेक किया था। यह भी मान्यता है कि भगवान शिव के परमभक्त परशुराम ने सबसे पहली कांवड़ उठाई थी।

उन्हें भी पहला कांवड़िया माना जाता है। जबकि कुछ लोगों का मानना है कि श्रवण कुमार ने कांवड़ की परंपरा की शुरुआत की थी। वह अपने दृष्टिहीन माता-पिता की हरिद्वार में गंगा स्नान करने की इच्छा को पूरा करने के लिए उन्हें कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार गंगा स्नान कराने लाए थे।

माना जाता है तभी से कांवड़ यात्रा की शुरुआत हुई। पुराणों के अनुसार इस यात्रा की शुरुआत समुद्र मंथन के समय हुई थी। समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को पीने के बाद भगवान शिव का गला नीला हो गया था।

विष के प्रभाव को कम करने के लिए चिंतित देवताओं ने पवित्र और शीतलता का पर्याय गंगा जल शिव के शरीर पर चढ़ाया। गंगा जल से शिवजी का जलाभिषेक करने से कुछ समय बाद ही भोलेनाथ का शरीर सामान्य होने लगा। इसी को आगे बढ़ाते हुए कांवड़िए हरिद्वार से गंगा जल लेकर नीलकंठ महादेव पर चढ़ाते हैं। यह यात्रा सदियों से चली आ रही है।

साभार- ‘नवभारत टाइम्स’

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