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हैदराबाद: बेरोजगार युवाओं को प्रति माह 2,000 रुपये बेरोजगारी भत्ता देना संभव नहीं

वित्त विभाग ने सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है कि जिसमें बेरोजगार युवाओं को प्रति माह 2,000 रुपये बेरोजगारी भत्ता देने को असंभव बताया है। मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने वित्त विभाग से प्रति माह बेरोजगारी भत्ता की संभावना का पता लगाने के लिए कहा था। हालांकि टीआरएस सरकार अपने चार साल के शासन में रोजगार प्रदान करने में नाकाम रही है। कांग्रेस ने घोषणा की कि साल 2019 में अगर वह सत्ता में आई तो 3000 बेरोजगारी भत्ता देगी।

वित्त विभाग का कहना है कि राज्य में बेरोजगारों की संख्या के बारे में किसी भी विभाग के साथ कोई विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। यह अनुमान लगाया गया है कि राज्य में लगभग 20 लाख बेरोजगार हो सकते हैं, इससे राज्य सरकार के खज़ाने पर हर साल 4,800 करोड़ रुपये अतिरिक्त भार पड़ेगा।

तेलुगू देशम पार्टी ने साल 2014 के चुनावों में अपने घोषणापत्र में बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था और वह आंध्र प्रदेश में जीती लेकिन उसने अभी तक कोई बेरोजगारी भत्ता प्रदान नहीं किया है। वैसे यह बेरोजगारी भत्ता वर्ष 2014 में टीआरएस के घोषणा पत्र का हिस्सा नहीं था और अब विपक्ष के हमले का मुकाबला करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।

लगभग 18 लाख बेरोजगार उम्मीदवार तेलंगाना लोक सेवा आयोग के साथ पंजीकृत हैं। लेकिन टीएसपीएससी डेटा पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि कुछ उम्मीदवार पहले से ही निजी क्षेत्र में नौकरियां कर रहे हैं और वे सिर्फ सरकारी नौकरी पाने का प्रयास करते हैं।

अधिकारियों ने प्रस्ताव किया है कि कुछ हद तक वित्तीय बोझ को कम करने के लिए सरकार केवल उन बेरोजगार लोगों को ही भत्ते पर विचार कर सकती है जो स्नातक हैं और 18 से 30 साल के आयु वर्ग में हैं।

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