Tuesday , December 12 2017

सावधान! अंधेरे में मोबाइल यूज़ करना ख़तरनाक़, जा सकती है आँखों की रोशनी

आज के दौर में युवाओं का ज्यादा से ज़्यादा वक्त मोबाइल फोन के साथ गुज़रता है, लेकिन हद से ज्यादा किसी भी चीज़ इस्तेमाल हमेशा नुकसानदायक होता है। ये बात यहाँ भी लागू होती है। जी हां ज़रूरत से ज़्यादा मोबाइल आपकी आंखों के लिए घातक है।

मोबाइल और उसकी बेटरी से निकलने वाला रेडिएशन को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है लेकिन अब मामला इससे भी आगे निकल चुका है।

रिसर्च के मुताबिक, अगर घुप्प अंधेरे में कोई घंटों तक मोबाइल चलाता है तो उसको दिखना भी बंद हो सकता है। इस तरह के मामले अब सामने भी आने लगे हैं। इसे टैंपरेरी ब्लाइंटनेस कहा जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक तीन से चार घंटे तक घुप्प अंधेरे में माबोइल चलाने से इसका सबसे बुरा असर रेटीना पर पड़ता है। इस तरह से रेटीना का मैक्यूलर एरिया तीखी रौशनी की वजह से प्रभावित होता है। पीड़ित व्यक्ति अगर सुबह उठने की कोशिश करता है तो उसका दिखना बंद हो जाता है।

शहरों में डॉक्टरों के पास इस तरह के कई मरीज़ पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक एक सप्ताह से 10 दिन तक इफेक्टेड व्यक्ति को परेशानी हो सकती है। एक बार रेटीना प्रभावित हो गया तो सिर में दर्द, भारीपन जैसी शिकायतें लगातार बनी रहती हैं। कई बार तो नींद ना आना बड़ी परेशानी बन जाती है जिसके लिए नींद की गोलियां तक लेनी पड़ती हैं।

रिसर्च में ये बात सामने आई है कि जिन्हें पहले से चश्मा लगा है उन्हें इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है, यानी बिना चश्मे   वालों के लिए अंधेरे में मोबाइल चलाना ज़्यादा खतरनाक है।  बच्चे और महिलाएं भी अकसर अंधेरे में मोबाइल इस्तेमाल करते हैं जो सबसे ज़्यादा घातक है।

मोबाइल को लेकर रेडिएशन से बचने के लिए विशेषज्ञों की राय है कि मोबाइल को नॉर्मल लाइट में ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। ब्रेन ट्यूमर और कैंसर जैसे लक्षणों के कारण बन रही इससे निकलने वाली किरणें अब आंखों की परेशानी पैदा कर रही हैं।

मोबाइल इस्तेमाल करने वालों को अगर अपनी आंखों का ख्याल रखना है तो अंधेरे में मोबाइल इस्तेमाल करना बंद करना होगा।

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