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पश्चिम बंगाल में हिंदू-मुस्लिम दुर्गा पूजा और मुहर्रम एक साथ मनाकर देते हैं धार्मिक एकता का संदेश

नवरात्र के मौके पर पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही हैं। यहाँ की संस्कृति में हिन्दू-मुस्लिम सद्भाव आम देखने को मिलता है। इस राज्य में देश के अन्य हिस्सों के मुकाबले धार्मिक सहनशीलता ज्यादा है।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण चौबीस परगना की। यहां दुर्गा पूजा में हिंदू-मुसलमान दोनों भाईचारे की मिसाल पेश कर रहे हैं।

यहाँ पर हिन्दू- मुस्लिम भाई आपस में सदियो से त्यौहार मिलजुल कर मनाते आए है और आगे भी मनाते रहेंगे। इनका मानना है कि आपसी एकता से ही समाज का विकास संभव है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के चौबीस परगना में रेदीघि नागेंद्रपुर दुगोत्सव कमिटी द्वारा 16 सालों से पंडाल का आयोजन हो रहा है। यहां 2001 से दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई। यह दुर्गा पूजा पंडाल शांति और धार्मिक सौहार्द का संदेश देता है।

इस पंडाल में दोनों समुदाय के लोग मिलकर दुर्गा पूजा करते हैं। ऐसे में यहां का माहौल देखने लायक है। नागेंद्रपुर के कमलकांत बताते हैं कि यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग मिलकर पूजा में हिस्सा लेते हैं। हम लोग दुर्गा पूजा और मुहर्रम दोनों साथ-साथ मना रहे हैं।

कमलकांत ने बताया कि जब नमाज का वक़्त होता है तो हम पूजा पंडाल में संगीत को बंद कर देते हैं। इसी तरह जब शाम को हमारी आरती होती है तो मस्जिद से किसी भी तरह का कोई आवाज़ नहीं होती। इससे हम दोनों समुदाय के लोगों के बीच किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं होती।

पूजा पंडाल समिति के सदस्य यासिन गाजी ने कहा कि हम सुंदरबन के जंगल में रहते हैं। हम वहां अनेक खतरों से जूझते हैं। उस समय हम एक दूसरे में फर्क नहीं करते। अब ऐसे में हमारे लिए चाहे ईद का त्यौहार हो या फिर दुर्गा पूजा उसमें कोई फर्क नहीं।

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