Friday , September 21 2018

किसी भी पत्रकार को फेक न्यूज के नाम पर दंडित नहीं किया जा सकता : एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया

नई दिल्ली : सरकार ने ‘फेक न्यूज़’ से जुड़े एक आदेश को फिर से मान्यता दी है, क्योंकि दंड एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की आलोचना के लिए आया था, जिसने इस कदम को “मनमाना” के रूप में निंदा किया। प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेश के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फेक न्यूज से जुड़े अपने दिशा-निर्देशों को 24 घंटे के भीतर वापस ले लिया है। इन दिशा-निर्देशों की चौतरफा आलोचना हुई थी। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने बयान जारी कर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के नोटिफिकेशन की आलोचना की है। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अपने बयान में कहा है कि वह किसी भी पत्रकार या मीडिया संस्थान को फेक न्यूज के नाम पर दंडित करने की सूचना-प्रसारण मंत्रालय के मनमानेपन की कड़ी निंदा करता है।

गिल्ड “उच्चतम पत्रकारिता मानकों” के लिए खड़ा था और यह कि वे ‘नकली समाचार’ को परिभाषित करने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सरकारों और मीडिया निकायों के साथ काम करने के लिए तैयार थे, एडिटर्स गिल्ड ने अपने बयान में कहा है कि इससे पत्रकारों के उत्पीड़न और संस्थाओं को झुकाने के उद्देश्य से तमाम ओछी शिकायतों का रास्ता खुल जाता। गिल्ड ने उस तरीके पर चिंता व्यक्त की जिसमें भारत की प्रेस कौंसिल – फर्जी खबरों के बारे में शिकायत दर्ज करने वाली एक संस्था का पुनर्निर्माण किया गया – तकनीकी आधार का हवाला देते हुए गिल्ड के उम्मीदवारों ने खारिज कर दिया। गिल्ड ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के नोटिफिकेशन को वापस लेने के लिए पीएमओ के दखल का स्वागत किया है लेकिन साथ में यह भी कहा है कि ऐसे मुद्दों पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ही फैसला ले। गिल्ड ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के हालिया पुनर्गठन के तरीके पर भी सवाल उठाया है। बयान में कहा गया है कि जिस तरीके से PCI का हालिया पुनर्गठन हुआ है उससे संस्था की स्वतंत्रता और निष्पक्ष भूमिका निभाने की उसकी क्षमता पर संदेह हो रहा है। एडिटर्स गिल्ड ने कहा कि पीसीआई के लिए उसके नॉमिनी को तकनीकी आधार पर अस्वीकृत कर दिया गया।

बता दें कि सोमवार रात सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देश में चेतावनी दी गई थी कि पत्रकारों द्वारा झूठी खबरें फैलाने या दुष्प्रचार करते हुए पाए जाने पर उनकी सरकार तक पहुंच रोक दी जाएगी और उनकी सरकारी मान्यता सीमित अवधि के लिए या स्थायी रूप से रद्द कर दी जाएगी। पत्रकारों और विपक्षी दलों ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी इस आदेश पर कड़ा विरोध जताया था और इस दिशानिर्देश को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया था। आखिरकार पीएमओ के आदेश पर मंत्रालय ने मंगलवार को दिशानिर्देशों को वापस ले लिया।

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