Friday , September 21 2018

तीन तलाक पर केंद्र के बिल के समर्थन में 8 राज्य

तीन तलाक की जुड़े केंद्र के ड्राफ्ट बिल का आठ राज्यों ने समर्थन किया है। लॉ मिनिस्ट्री ने लगभग एक पखवाड़े पहले जुबानी, लिखित या किसी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को देने पर प्रतिबंध लगाने और इसे एक दंडनीय और गैर-जमानती अपराध बनाने से जुड़े प्रस्तावित कानून पर सभी राज्य सरकारों से राय मांगी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने सदियों से चली आ रही इस इस्लामिक प्रथा को अगस्त में मनमाना और असंवैधानिक करार दिया था,  छह अन्य राज्यों ने ड्राफ्ट बिल पर सरकार का समर्थन किया है, जबकि अन्य राज्यों के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।श,

ड्राफ्ट बिल में अपनी पत्नियों को तीन बार ‘तलाक’ बोलकर तलाक देने की कोशिश करने वाले मुस्लिम पुरुषों को तीन वर्ष की कैद की सजा देने और पीड़ित महिलाओं को कोर्ट से गुहार लगाकर उचित मुआवजा और अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी मांगने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। आधिकारिक डेटा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के अगस्त के फैसले के बाद देश भर से तीन तलाक देने के 67 मामलों की रिपोर्ट मिली है। इनमें से अधिकतर मामले उत्तर प्रदेश के हैं। हालांकि, यह कानून बनने के बाद भी जम्मू और कश्मीर में लागू नहीं होगा।

कोर्ट के फैसले के बाद भी तीन तलाक की शिकायतें मिलने के मद्देनजर केंद्र ने इसका समाधान निकालने का उपाय सुझाने के लिए एक कमिटी बनाई थी। कमिटी में होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह, फाइनैंस मिनिस्टर अरुण जेटली, लॉ मिनिस्टर रवि शंकर प्रसाद, माइनॉरिटी अफेयर्स मिनिस्टर मुख्तार अब्बास नकवी और दो राज्यमंत्री शामिल हैं। इसके बाद ही ‘मुस्लिम विमिंज प्रॉटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज ऐक्ट’ नाम का ड्राफ्ट बिल तैयार किया गया है।

उधर, सरकार ने कैशलेस इकनॉमी को बढ़ावा देने के लिए नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स ऐक्ट में संशोधन करने का प्रस्ताव दिया है। इस ऐक्ट में अंतिम बार दो वर्ष पहले संशोधन किया गया था। केंद्रीय मंत्रिमंडल तीन तलाक से जुड़े ड्राफ्ट बिल और नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट में प्रस्तावित संशोधनों पर शुक्रवार को विचार कर सकता है। मंत्रिमंडल से अनुमति मिलने के बाद इन्हें संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा।

TOPPOPULARRECENT