Saturday , July 21 2018

यूपी चुनाव: बसपा की अब तक की सबसे बड़ी हार के पीछे किसका हाथ ?

यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सपा-कांग्रेस, बसपा को मात देते हुए भारी सीटों पर कब्ज़ा जमा लिया है। इन चुनावों में मायावती को सबसे कम सीटें मिली हैं। मायावती की इस हार के पीछे कई कयास लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि यूपी विधानसभा से भी दूर होना उनके व उनकी पार्टी के राजनीतिक भविष्य को संकट में डाल गया है।

यूपी की राजनीति में बसपा का पतन तेजी से हो रहा है। सवाल है क्यों ? इसकी कुछ ख़ास वजहों पर बात करते हैं। चुनाव विशेषज्ञों के मुताबिक:

बसपा ने दलितों के साथ अन्य पिछड़े वर्ग और गरीब जातियों को तो अपने साथ जोड़ा लेकिन उनके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने सिर्फ एक ही तरह के वोटबैंक को जोड़ने की तरफ ध्यान दिया। दूसरी जातियों से जुड़ने की कोशिश नहीं की। जिसका खामियाजा उन्हें इस चुनाव में भुगतना पड़ा है।

यूपी में इस हार का कारण मायावती खुद भी हैं। कांशीराम के बाद से मायावती ही पार्टी की अध्यक्ष और प्रवक्ता रही हैं। बसपा के पास मायावती के अलावा कोई और चेहरा नहीं है जो लोगों के सामने आकर पार्टी की बात रखे और पार्टी के प्रवक्ता के तौर पर काम करे। पार्टी में इकलौता चेहरा होना भी उनके खिलाफ जाता है।

यूपी में चुनाव प्रचार के दौरान मायावती ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस और रैलियों में एक ही मुद्दा उठाया। हालांकि उन्होंने आरक्षण को आगे रखकर मुस्लिमों के हक की बात ही की और उन्हें भी पार्टी के साथ लिया। लेकिन इन तमाम रैलियों में मायावती ने सिर्फ बीजेपी और विपक्षी पार्टियों की ही बात की और उनपर निशाने साधे।

सबसे ख़ास वजह कि जिस तरह से बीजेपी सपा-कांग्रेस गठबंधन ने इन चुनावों में प्रचार करने में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। लेकिन बसपा सोशल मीडिया पर प्रचार करने में भी पीछे रही

TOPPOPULARRECENT