सऊदी अरब पत्रकार हत्या मामले में तुर्की सख्त, एर्दोगन ने कहा- ‘दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा’

सऊदी अरब पत्रकार हत्या मामले में तुर्की सख्त, एर्दोगन ने कहा- ‘दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा’
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सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्याकांड के बारे में न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक बड़ा ख़ुलासा करते लिखा है कि वरिष्ठ सऊदी अधिकारियों ने ख़ाशुक़जी की हत्या के लिए इस्तांबूल स्थित अपने कांसूलेट में 15 विशेषज्ञों की टीम तैनात की थी।

मंगलवार को न्यूयॉर्क टाइम्स ने तुर्की के विदेश मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी के हवाले से लिखा है कि इस हत्यारी टीम में एक फ़ोरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल था, जिसे लाश को टुकड़े टुकड़े कर सुबूत मिटाने के लिए इस्तांबूल स्थित सऊदी कांसूलेट भेजा गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक़, सऊदी हत्यारी टीम आरी अपने साथ कांसूलेट लेकर पहुंची थी, ख़ाशुक़जी की हत्या के बाद उनके शरीर के टुकड़े टुकड़े इसी आरी से किए गए।

विभिन्न देशों से तुर्की पहुंचने वाले इस हत्यारे दल ने हत्या के इस कांड को 2 घंटे में अंजाम दिया।

एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी ने इस हत्याकांड को क्वांटिन टैरेंटिनो द्वारा निर्देशित 1994 हॉलीवुड फ़िल्म में दिखाई जाने वाली हिंसा की तरह बताया है।

सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान पर आरोप है कि उन्होंने ख़ाशोक़ुजी की कथित हत्या का सीधा आदेश दिया था, जिसके बाद अमरीका और सऊदी अरब के दूसरे घटकों पर इस हत्याकांड में पारदर्शी जांच के लिए दबाव बढ़ गया है।

हालांकि आले सऊद शासन ने ख़ाशुक़जी के लापता होने या कथित हत्या में किसी भी तरह शामिल होने के आरोपों का खंडन किया है।

सऊदी युवराज का कहना है कि ख़ाशुक़जी 2 अक्तूबर को कांसूलेट पहुंचे थे, जिसके कुछ देर बाद वे वहां से चले गए थे, लेकिन तुर्क राष्ट्रपति रजब तैय्यब अर्दोगान ने रियाज़ से मांग की है कि वह कांसूलेट से ख़ाशुक़जी के निकलने के दावे को साबित करे।

तुर्की के अख़बार सबाह ने मंगलवार को इस्तांबूल पहुंचने वाली 15 सदस्यीय सऊदी हत्यारी टीम के नाम और फ़ोटो प्रकाशित करते हुए आरोप लगाया है कि यह टीम उसी दिन इस्तांबूल पहुंची है, जिस दिन पत्रकारी ख़शुक़जी सऊदी कांसूलेट से लापता हुए हैं।

मंगलवार को अमरीका की संसदीय विदेश नीति समिति के प्रमुख बॉब कोरकर ने कहा है कि आज हर चीज़ इस बात की ओर संकेत कर रही है कि ख़ाशुक़जी का पिछले हफ़्ते सऊदी कांसूलेट में मर्डर किया गया है।

कमाल ख़ाशुक़जी सऊदी अरब के एक वरिष्ठ पत्रकार थे जो वाशिंगटन पोस्ट के लिए नियमित रूप से लिखते थे। उन्हें सऊदी सरकार की नीतियों का आलोचक समझा जाता था और वे अपनी जान को ख़तरे के कारण कुछ समय से विदेश में रह रहे थे।

मंगलवार को वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि सऊदी अधिकारी ख़ाशुक़जी को स्वदेश वापस लेकर जाना चाहते थे, ताकि वहां उनकी आवाज़ को ख़ामोश किया जा सके।

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