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पूर्व नौकरशाहों की मांग, जयंत सिन्हा को मंत्री पद से बर्खास्त किया जाये

नई दिल्ली: मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त जूलियो रिबेरो, पूर्व सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला और 41 अन्य पूर्व नौकरशाहों ने पीट-पीटकर हत्या मामले के आठ दोषियों को माला पहनाने को लेकर केंद्रीय मंत्री जयन्त सिन्हा को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की है. पूर्व नौकरशाहों ने बयान जारी कर कहा कि सिन्हा के इस कदम से ‘अल्पसंख्यकों की हत्या का लाइसेंस प्राप्त होने का’ संदेश जाता है. बयान में कहा गया है कि इससे इस तरह के आपराधिक मामलों के आरोपियों की ‘ वित्तीय, कानूनी और राजनीतिक मदद ’ को बढ़ावा मिलेगा. सिन्हा ने मांस कारोबारी अलीमुद्दीन अंसारी की पीट-पीटकर हत्या मामले के दोषियों का जेल से बाहर आने पर पिछले सप्ताह स्वागत किया था. इस बात को लेकर विवाद पैदा हो गया था.

कांग्रेस ने भी मांगा था इस्तीफा
गौरतलब है कि कांग्रेस ने झारखंड में लिंचिंग के दोषियों को माला पहनाकर उनका कथित तौर पर स्वागत करने वाले केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा के इस्तीफे की मांग की थी और आरोप लगाया था कि नरेंद्र मोदी सरकार में ‘नफरत और हिंसा की राजनीति का सरकारीकरण’ हुआ है. पार्टी नेता प्रमोद तिवारी ने सवाल किया था कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई लिंचिंग की हालिया घटनाओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ‘मौन’ क्यों हैं? तिवारी ने संवाददाताओं से कहा, ‘केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा की ओर से अभियुक्तों को माला पहनाना क्या इस बात का संदेश नहीं है कि भारत सरकार इस तरह के लोगों के साथ खड़ी है?

हिंसा की राजनीति का सरकारीकरण हुआ
सिन्हा ने जो किया है वह संविधान और कानून के खिलाफ है. हमें उम्मीद थी कि जयंत सिन्हा ने जो कृत्य किया है उसको लिए उन्हें बर्खास्त किया जाएगा. इस मामले में उनको इस्तीफा देना चाहिए. उनके पिता यशवंत सिन्हा ने जो शब्द कहा उसे मैं नहीं दोहरा सकता.’ उन्होंने दावा किया कि नफरत और हिंसा की राजनीति का सरकारीकरण हुआ है.

तिवारी ने कहा, ‘2017 में लिंचिंग की 61 घटनाएं हुई हैं. ये घटनाएं उन्हीं राज्यों में हो रही हैं जहां भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकारें हैं.’ उन्होंने सवाल किया, ‘प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं? इस पर मोदी जी की मन की बात क्यों नहीं आती? क्या उनके मौन से इन घटनाओं को बढ़ावा नहीं मिल रहा है? अमित शाह ने चुप्पी क्यों साध ली है?

क्या है मामला
रामगढ़ थानाक्षेत्र के बाजार टांड इलाके में पिछले साल 29 जून को मांस कारोबारी अलीमुद्दीन अंसारी को भीड़ ने इस संदेह के आधार पर पीट पीटकर मार डाला था कि उसकी कार में बीफ है. झारखंड उच्च न्यायालय से हाल में जमानत मिलने पर आरोपियों के जेल से रिहा होने पर जयंत सिन्हा ने खुशी प्रकट की थी और उन्हें माली पहनाई और मिठाइयां खिलाईं. सिन्हा ने कहा था कि वह उन्हें देखकर खुश हैं क्योंकि वे उनके निर्वाचन क्षेत्र के हैं एवं उन्हें न्याय दिलाना उनका कर्तव्य है. आठ आरोपियों ने वकील का इंतजाम करने को लेकर सिन्हा को धन्यवाद दिया.

पिता ने की थी आलोचना
इस विवाद के सामने आने के बाद केंद्रीय मंत्री के पिता यशवंत सिन्हा ने भी आलोचना की थी. यशवंत सिन्हा ने कहा कि पहले वह ‘लायक’ बेटा के ‘ नालायक ’ बाप थे लेकिन अब स्थिति उलट गई है. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह अपने पुत्र की करतूत को सही नहीं ठहराते. सिन्हा ने अपने ट्वीट में कहा था कि पहले मैं लायक बेटा का नालायक बाप था. अब भूमिका बदल गई है. यह ट्विटर है. मैं अपने बेटे की करतूत को सही नहीं ठहराता. लेकिन मैं जानता हूं कि इससे और गाली-गलौज होगी. आप कभी नहीं जीत सकते.’

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