राफेल डील: फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के बयान के बाद भारत में सियासी भूचाल, मुश्किल में मोदी सरकार!

राफेल डील: फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के बयान के बाद भारत में सियासी भूचाल, मुश्किल में मोदी सरकार!
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राफेल डील पर फ्रांस की सरकार का बड़ा बयान आया है। फ्रांस सरकार ने कहा है कि राफेल डील से जुड़ा भारतीय बिजनेस पार्टनर कौन होगा ये तय करने में फ्रांस की सरकार का कोई रोल नहीं था। फ्रांस की कंपनियों को इस बात की खुली छूट थी कि वो किस भारतीय कंपनी को राफेल डील की साझेदार कंपनी के तौर पर चुनें।

फ्रांस सरकार का ये बयान पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के उस बयान पर प्रतिक्रिया है जिसमें कहा गया है कि 58 हज़ार करोड़ की राफेल डील में रिलायंस डिफेंस को पार्टनर बनाने का प्रस्ताव भारत सरकार ने दिया था और भारत सरकार के प्रस्ताव के बाद फ्रांस की कंपनी के पास इस प्रस्ताव को मानने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था।

फ्रांस की एक मैगजीन मीडिया पार्ट को दिए इंटरव्यू में फ्रांस्वा ओलांद ने कहा है, ‘’राफेल डील के वक्त भारत सरकार ने निर्माण में साझेदारी के लिए डसॉल्ट कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट अनिल अंबानी की कंपनी को देने का प्रस्ताव दिया था। भारत सरकार के प्रपोजल के बाद डसॉल्ट एविएशन के पास दूसरा विकल्प नहीं था। अनिल अंबानी की कंपनी चुनने में डसॉल्ट एविएशन का कोई रोल नहीं था।‘’

राफेल डील पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के खुलासे से देश की सियासत गर्म हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ हल्ला बोल दिया है और आज सुबह ही राहुल गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक आज ही बीजेपी भी फ्रांस में हुए खुलासे पर अपना जवाब दे सकती है।

इस इंटरव्यू बाद राहुल गांधी ने डायरेक्ट मोदी को टारगेट किया और कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को धोखा दिया है। राहुल ने कहा, ‘’प्रधानमंत्री ने बंद कमरे में राफेल सौदे को लेकर बातचीत की और इसे बदलवाया। फ्रांस्वा ओलांद का धन्यवाद कि अब हमें पता चला कि उन्होंने (मोदी ने) दिवालिया अनिल अंबानी को अरबों डॉलर का सौदा दिलवाया। प्रधानमंत्री ने भारत के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने हमारे सैनिकों के लहू का अपमान किया है।‘’

राफेल डील को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर कई संगीन आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के आरोपों के मुताबिक सरकार ने राफेल के निर्माण में साझेदारी की डील में घोटाला किया और अनुभवी सरकारी कंपनी एचएएल की जगह बिना अनुभव वाली रिलायंस डिफेंस को चुना। राफेल की कीमत 590 करोड़ से बढ़ाकर 1690 करोड़ तक पहुंचा दी गई।

मोदी सरकार बार-बार ये दावा करती रही है कि डसॉल्ट और रिलायंस के बीच समझौता दो निजी कंपनियों की डील थी और इसमें भारत सरकार का कोई रोल नहीं था इसलिए ओलांद के इंटरव्यू के बाद रक्षा मंत्रालय भी हैरान रह गया।

मंत्रालय की तरफ से एक बयान जारी कर कहा गया है कि ओलांद के उस बयान की जांच की जा रही है जिसमें ये कहा गया है कि भारत सरकार ने डसॉल्ट के साथ साझेदारी के लिए एक खास कंपनी का नाम दिया था। पहले ही कहा जा चुका है कि इस कमर्शियल फैसले में न तो फ्रांस और न ही भारत सरकार का कोई किरदार था।

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