तथ्यों की जांच : फ़र्ज़ी ख़बरों के अनेक तरीके जिसमें मुसलमानों से नफरत का मसाला भरा हो

तथ्यों की जांच : फ़र्ज़ी ख़बरों के अनेक तरीके जिसमें मुसलमानों से नफरत का मसाला भरा हो
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सोशल मीडिया गलत जानकारी फ़ैलाने के लिए एक सुविधाजनक माध्यम बन गया है। फ़र्ज़ी ख़बरें कई गुना बढ़ी है, जिनकी प्रकृति सांप्रदायिक हैं और धर्म के आधार पर विभाजित करने के लिए उत्तेजित करती हैं।

‘ऑल्ट न्यूज’ ने पाया है कि पिछले कुछ महीनों में मुसलमानों और ईसाइयों को लक्षित करने के लिए एक व्यवस्थित, सिंक्रनाइज़ और संगठित प्रयास चल रहा है जबकि लगातार हिंदू समुदाय को शिकार के रूप में दिखाया जाता है।

9 वर्ष की बेटी को भगवाधारी गुंडों ने बचा लिया साजिद नामक वैसी दरिंदे से। इस सन्देश के साथ एक वीडियो वायरल किया गया है जिसमें एक बच्ची को रोते हुए देखा जा सकता है और एक युवक को कुछ लोग पीट रहे हैं।

यह वीडियो जो लोग शेयर कर रहे हैं, वो ये दावा कर रहे है कि इस बच्ची का यौन-शोषण साजिद नाम का युवक करने ही वाला था तभी मौके पर कुछ लोगों ने बचा लिया।

यह विडियो कुंवर अजय प्रताप (@sengarajay235) नाम के यूजर ने ट्वीट किया है, जिन्हें पीएम मोदी फॉलो करते हैं। इस ट्वीट को 1200 से ज्यादा बार शेयर किया गया था लेकिन अजय सिंह ने इस वीडियो का क्रेडिट सुरेश पटेल को दिया है।

सोशल मीडिया पर सबसे पहले यह विडियो इस दावे के साथ पोस्ट करने वालों में से शायद एक सुरेश पटेल हैं जिनके द्वारा पोस्ट किए गए विडियो को 77000 से अधिक बार देखा गया है।

एक और ट्वीट @goyalsanjeev नाम के यूजर ने किया है जिसे पीयूष गोयल के अधिकारिक ट्विटर अकाउंट द्वारा फॉलो किया जाता है। इस विडियो को यूजर स्वामी निश्चलानंद ने भी ट्वीट किया है।

विडियो में दिख रही नंबर प्लेट के अनुसार UP-19 शामली जिले में पंजीकृत वाहन का नंबर प्लेट है। ऑल्ट न्यूज़ ने शामली जिला पुलिस से संपर्क किया और इस विडियो का पता लगाया, तो इसे झिंजाना पुलिस स्टेशन में पंजीकृत एक घटना के रूप में पहचाना गया।

ऑल्ट न्यूज़ के साथ बातचीत में झिंजाना स्टेशन के पुलिस निरीक्षक एमएस गिल ने कहा, “हां, यह विडियो हमारे पुलिस स्टेशन में पंजीकृत एक घटना से संबंधित है। आरोपी गोकुल रामदास गढ़ी पुख्ता के ताना गाँव का निवासी है, गोकुल को गिरफ्तार कर लिया गया है।” यहाँ यह ध्यान देने वाली बात है कि आरोपी का नाम गोकुल रामदास है, न कि साजिद।

भारत की मुस्लिम समुदाय को अक्सर फर्जी खबर बनाने वालों के द्वारा निशाना बनाया जाता है। हाल ही में, सोशल मीडिया पर एक दावा व्यापक रूप से फैलाया गया था, जिसके अनुसार 2016 में बलात्कार के 95फीसदी अपराधी मुस्लिम थे।

यह भी पूरी तरह से झूठा प्रचार था। इस तरह की गलत जानकारी अब आम हो गई है क्योंकि नकली समाचार फ़ैलाने वाले अपने सांप्रदायिक विभाजन के एजेंडे को बढ़ाने का प्रयास लगातार करते रहते हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) भारत में अपराध पर आंकड़ों के संकलन के लिए प्रमुख संस्था है। ‘भारत में अपराध’ (क्राइम इन इंडिया) पर एनसीआरबी डेटा का अंतिम रिपोर्ट 2016 में किए गए अपराध की घटनाओं की एक सूची है।

2016 में अपराधों को दर्ज करने के तरीकों के अनुसार यह ‘आबादी’ सेगमेंट है जो दस्तावेज में जिस तरह के अपराध दर्ज किए जाते हैं, इस आधार पर जनसांख्यिकी को परिभाषित करता है। अपराध को रिकॉर्ड करने के लिए धर्म का कोई संदर्भ नहीं है।

मंदसौर, मध्यप्रदेश में जून 2018 में 8 साल की बच्ची के साथ हुए भयानक बलात्कार को सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है। हजारों यूजर्स एक संदेश शेयर कर रहे हैं, जिसके अनुसार मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मंदसौर की सड़कों पर रैली निकाली और अपराधी को रिहा करने की मांग की, इसलिए क्योंकि कुरान में गैर-मुस्लिम महिलाओं से बलात्कार जायज हैं। यह संदेश फेसबुक और ट्विटर पर हजारों यूजर्स ने शेयर किया है।

यह संदेश एक वेबसाइट www.indiaflare.com के लेख के साथ शेयर किया जा रहा है। इस लेख का शीर्षक है, ‘क़ुरान में दूसरे धर्म की लड़कियों से बलात्कार जायज़, इरफ़ान खान को रिहा करो।’ शायद यही लेख इस वायरल संदेश का श्रोत हो सकता है।

इस लेख में दिए गए तस्वीर में कुछ मुस्लिमों को सड़क पर हाथों में तख्तियां लिए रैली करते हुए देखा जा सकता है, जिस पर ‘इरफ़ान को रिहा करो’ लिखा दिख रहा है। यह लेख 1 जुलाई को पोस्ट किया गया है जिसे अबतक 37000 से ज्यादा बार शेयर किया गया है।

पोस्ट की गई तस्वीर जो दिखाती है कि मुस्लिमों ने आरोपी के समर्थन में रैली की थी, यह फ़ोटोशॉप की गई है। ऑल्ट न्यूज़ ने Google रिवर्स इमेज खोज की और पाया कि यह प्रदर्शन वास्तव में मंदसौर में हुआ था, लेकिन यह पीड़ित के समर्थन में और आरोपी के खिलाफ था। असली तस्वीर नीचे पोस्ट की गई है।

“हिंदुस्तान का शेर जिसने As*** का बदला लिया। (Hindustan ka sher jisne As*** ka badla lia)”यह सांप्रदायिक पोस्ट रजिया बानो नाम के फेसबुक अकाउंट से मंदसौर बलात्कार मामले के आरोपी का समर्थन देते हुए किया गया है और कहा गया है कि यह कठुआ बलात्कार पीड़िता का बदला है।

कठुआ बलात्कार मामले ने कुछ ही महीने पहले पूरे देश को झकझोड़ कर रख दिया था। इस पोस्ट के अनुसार मंदसौर की घटना कठुआ रेप केस में मुस्लमान लड़की से हिन्दू द्वारा किये गए बलात्कार और हत्या का बदला है क्योंकि इसमें पीड़िता हिन्दू और आरोपी मुसलमान है।

इंडियाफ्लेअर के लेख में न केवल मुस्लिम समुदाय को भयावह तरीके से लक्षित किया गया है बल्कि नकली फोटो और गलत जानकारी द्वारा इस मंदसौर बलात्कार मामले को कठुआ मामले से तुलना करने की कोशिश भी की गई है, जहाँ आरोपी के समर्थन में कुछ लोगों ने रैली निकाली थी।

ऑल्ट न्यूज ने देखा है कि हाल के दिनों में कई संदिग्ध वेबसाइटें बढ़ी हैं जो समाचार पोर्टल होने का दावा करती हैं। ये वेबसाइटें सनसनीखेज सुर्खियों के साथ लेख पोस्ट करती हैं और गलत जानकरियां फैलाती है जो अक्सर सांप्रदायिक होते हैं। पाठकों को इन वेबसाइटों से मिलने वाली जानकारी के संबंध में सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

इन सुअरों द्वारा ये शिक्षा दी जाती है मदरसों में..फिर कहते हैं हिन्दू भाईचारा नही रखते Hinduism -0 and Islam -3 (हिंदू धर्म -0 और इस्लाम -3.)” यह पोस्ट एक फेसबुक ग्रुप वी सपोर्ट नरेंद्र मोदी (WE SUPPORT NARENDRA MODI) में पोस्ट किया गया था, जिसमें 28 लाख से ज्यादा सदस्य हैं। इस पोस्ट में मदरसे के शिक्षक द्वारा इस्लाम को हिंदू धर्म की तुलना में एक बेहतर धर्म होने का दावा करते हुए दिखाया जा रहा है।

इस पोस्ट को कई फेसबुक पेज ने पोस्ट किया है। आजाद भारत नामक पेज जिसके 6 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स है, इस पेज ने भी इसी दावे के साथ इसे पोस्ट किया है। इसके अलावा, यह फेसबुक और ट्विटर पर विभिन्न शब्दों के साथ व्यापक रूप से साझा किया गया है लेकिन सबका संदर्भ एक ही है।

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