फर्जी डिग्री : जांच फीस न भेजने से अटका डीयू छात्रसंघ अध्यक्ष अंकिव का मामला

फर्जी डिग्री : जांच फीस न भेजने से अटका डीयू छात्रसंघ अध्यक्ष अंकिव का मामला
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अंकिव बसोया डिग्री मामले में सोमवार को नया मोड़ आ गया। थिरुवल्लुवर यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक सेंथिल कुमार बाला सुब्रमण्यम ने डीयू द्वारा अंकिव बसोया की डिग्री जांच के संबंध में पत्र मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि डीयू ने जांच के लिए फीस नहीं भेजी है।

सेंथिल ने बताया कि डीयू का पत्र मिला है और उसका जवाब भी दिया गया है। यह जवाब सोमवार को लगभग सवा दो बजे भेजा गया है। उन्होंने बताया कहा कि डीयू ने हमें पत्र के साथ प्रमाणपत्र जांच की फीस नहीं भेजी है, इसलिए हमने उनको जवाब में फीस देने के लिए लिखा है।

बुद्धिष्ट विभाग को दूसरे पत्र का भी जवाब नहीं मिला : डीयू छात्रसंघ अध्यक्ष अंकिव बसोया मामले में सोमवार को बौद्ध अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. केटीएस सराव ने कहा कि उन्होंने दो बार थिरुवल्लुआर यूनिवर्सिटी को पत्र लिखा है, लेकिन उनका जवाब नहीं आया है।

उन्होंने कहा कि डीयू के रजिस्ट्रार और प्रॉक्टर सहित डीयू के अन्य अधिकारियों को भी पत्र लिखकर अपनी स्थिति से अवगत कराया है।

आज कोर्ट में होनी है सुनवाई

एनएसयूआई ने कहा कि हमारे समक्ष अब न्यायालय का रास्ता है। इस मामले की सुनवाई मंगलवार को है और हमें उम्मीद है कि न्याय होगा। एनएसयूआईके अधिकारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के ईमानदार अधिकारी जो इस जांच में शामिल थे या तो उन्हें हटा दिया गया या उन पर दबाव डालकर इस्तीफा ले लिया गया। लेकिन वे हार नहीं मानने वाले हैं। ज्ञात हो कि सबसे पहले एनएसयूआई ने अंकिव बसोया का मामला उठाया था और दो बार विरोध प्रदर्शन भी किया था।

डीयू गंभीर नहीं : एनएसयूआई

एनएसयूआई ने सोमवार को कहा कि डीयू छात्रसंघ अध्यक्ष की डिग्री जांच मामले में डीयू प्रशासन गंभीर नहीं है। आखिर क्या कारण है कि एक महीने से अधिक का समय बीत जाने पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। एनएसयूआई के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने आरोप लगाते हुए कहा है कि छात्रसंघ कार्यालय से अध्यक्ष नदारद हैं। कमरा इन दिनों खाली है और वहां पर उनके समर्थक नाच रहे हैं। हम लगातार इसके खिलाफ आवाज उठाते आ रहे हैं।

छात्र नेताओं की पहली पसंद बौद्ध अध्ययन केंद्र

डीयू का बौद्ध अध्ययन विभाग पिछले कुछ वर्षों से छात्रसंघ चुनाव में भागीदारी लेने वाले छात्र नेताओं की पहली पसंद है। प्राय: छात्रसंघ चुनाव आते ही यह सुर्खियों में आ जाता है और अगर फर्जी डिग्री जैसा कोई मामला हो तो यह साल भर सुर्खियों में रहता है। पिछले 10 वर्षों के छात्रसंघ चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर ध्यान दें तो पता चलेगा कि सबसे अधिक बौद्ध अध्ययन विभाग के छात्र चुनाव में हिस्सा लेते हैं। 2010, 2013, 14, 2017 तथा 2018 के छात्रसंघ चुनाव में इसी विभाग से अध्यक्ष चुने गए हैं। बौद्ध अध्ययन विभाग से एबीवीपी तथा एनएसयूआई दोनों संगठनों के छात्र दाखिला लेकर चुनाव लड़ते हैं।

2014 में छह उम्मीदवार इसी विभाग से

2014 में डूसू चुनाव में कुल 28 उम्मीदवारों में से 6 बौद्ध अध्ययन केंद्र के थे। एबीवीपी से अध्यक्ष पद का चुनाव जीत चुके मोहित नागर यही से थे। वर्ष 2010 से 2013 के बीच हुए डूसू चुनाव में वर्ष 2012 के चुनाव को छोड़कर सभी में इस विभाग के छात्रों को जीत मिली थी। वर्ष 2010 में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद का चुनाव जीते जितेंद्र चौधरी व प्रिया डबास, 2011 में संयुक्त सचिव पद का चुनाव जीते दीपक बंसल या 2013-14 के छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर चुने गए अमन अवाना और संयुक्त सचिव पद पर चुने गए राजू रावत यहीं के छात्र हैं।

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