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हैदराबाद : वाहन चलाने के आरोपी किशोर को पहली बार जेल भेजा

हैदराबाद। शहर में पहली बार 14 वर्षीय लड़के को जो कम उम्र में ड्राइविंग के लिए दोषी पाया गया और उसको चार सप्ताह की कारावास की सजा दी गई और उसे बाल्यघर भेज दिया गया। नौवें विशेष महानगर मजिस्ट्रेट अल्ताफ हुसैन ने गुरुवार को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 180 के तहत बच्चों को वाहन चलाने के लिए 10 माता-पिता को जेल भेज दिया। उधर, पुलिस का कहना है कि वे नाबालिग चालकों, वाहनों के मालिकों और नाबालिग के माता-पिता के खिलाफ चार्जशीट बुक कर रहे हैं।

शहर यातायात पुलिस कम आयु में वाहन चलाने को लेकर गत एक माह से विशेष अभियान चला रही है। कम आयु वाले वाहन चलाते समय पकड़े जाते है तो केवल जुर्माना ही नहीं बल्कि वाहन को भी जब्त कर रहे हैं। साथ ही वाहन के मालिक (माता-पिता या अन्य) के खिलाफ मामला दर्ज करके कोर्ट में पेश कर रहे हैं।

डीसीपी रंगनाथ ने बताया कि पिछले कुछ सालों से वाहन देने वाले ‘पिता’ को एक-दो दिन की सजा होती थी लेकिन पहली बार एक माइनर को सजा दी गई है। भारत मोटर वाहन अधियनिय (एमवी एक्ट) के अनुसार 16 साल की कम आयु वालों के लिए वाहन चलाना अपराध है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए यातायात पुलिस ने गत माह विशेष अभियान चलाया और उसके ‘पिता’ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ विनोद कुमार कहते हैं कि यह सही कदम है और अल्पकालिक ड्राइविंग को रोकने के लिए पूरे देश में एक महान उदाहरण स्थापित करेगा। उन्होंने कहा, ‘एक दिन के लिए एक किशोर गृह में रहना उस पर एक बड़ा असर होगा और नाबालिग अपराध को दोहराने से डरेगा।

बच्चों को कैद में लेने के बाद माता-पिता अधिक सतर्क होंगे और अपने बच्चों को नियंत्रण करेंगे। अगर पुलिस लगातार दस ऐसे मामलों की जांच करती है, और अगर अदालत उन सभी को जेल करती है, तो हम निश्चित रूप से माता-पिता और नाबालिगों में बदलाव देखेंगे।

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