Wednesday , April 25 2018

ISIS के मामले में भारत में पहली सजा सुनाई गई, यास्मीन को दी गई 7 साल की सजा

आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से संबंधित किसी मामले में भारत में पहली बार सजा सुनाई गई है। कोच्चि स्थित एनआईए कोर्ट ने शनिवार को एक महिला को 7 साल जेल की कठोर सजा सुनाई है।

बिहार की रहने वाली यास्मीन मोहम्मद जाहिद को अफगान स्थित इस्लामिक स्टेट में शामिल होने का दोषी पाया गया है। जिसके बाद कोर्ट ने उसे 7 साल कैद की सजा सुनाई है। जेल के अलावा जास्मीन पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

30 साल की यास्मीन बिहार सीतामढ़ी जिले की रहने वाली है। मामला में कासरगोड जिले के 14 अन्य लोगों को दोषी पाया गया है कि जिन्होंने मई और जुलाई 2016 में भारत छोड़कर आईएसआईएस ज्वाइन किया है।

एनआईए की जांच के मुताबिक मामले में मुख्य आरोपी अब्दुल राशिद अब्दुल्ला ने यास्मीन मोहम्मद जाहिद समेत अन्य लोगों को आईएसआईएस ज्वाइन करने के लिए नियुक्त किया था। इसके लिए राशिद ने साल 2015 में रमजान के वक्त कासरगोड समेत कई स्थान पर बैठक की थी और लोगों को आईएसआईएस से जुड़ने के लिए प्रेरित किया था।

यास्मीन को दिल्ली एयरपोर्ट पर 30 जुलाई 2016 को अपने बेटे के साथ गिरफ्तार किया गया था। वह काबुल अपनी पति के साथ आईएस ज्वाइन करने के लिए जा रही थी।

कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले में यास्मीन और अब्दुल राशित अब्दुला को दोषी मानने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। मामले की सुनावाई में जज ने जास्मीन को आईपीसी की धारा 120बी के तहत तीन साल की जेल, धारा 125 के तहत दोषी पाया गया। कोर्ट ने यास्मीन को 7 साल की सजा और 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।

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