बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहते अशोक चौधरी मुसलमानों को पार्टी से जोड़ने में नाकाम रहें!

बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहते अशोक चौधरी मुसलमानों को पार्टी से जोड़ने में नाकाम रहें!

बिहार कांग्रेस में भूचाल, पार्टी के चार सदस्य परिषद ने अशोक चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस का दामन छोड. जदयु० में शामिल होने का किया एलान۔काँगरेस हाईकमान ने चारों को पार्टी से किया निलंबित۔
हम के अध्यक्ष जीतन राम मांझी के राजग छोड़ने के बाद अब बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी में भूचाल आ गया।

बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी के नेतृत्व में एक साथ चार सदस्य परिषद तनवीर अखतर,राम चंद्र भारती,दलीप चौधरी और अशोक चौधरी ने कांग्रेस छोड़कर अलग खेमा बनाने का आवेदन परिषद के उप चयर मैन को सौंप दीया। और राजनीतिक गलियारे में हलचल पैदा कर दीया है।

अशोक चौधरी ने मीडिया प्रतिनिधियों से कहा कि अब वह जदयु में शामिल होकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ बिहार की सेवा करेंगे। इस खबर के मिलते ही कांग्रेस हाइ कमान ने उन चारों को पार्टी से निलंबित कर दिया है।

अशोक चौधरी ने बताया कि जब वह बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए थे तब परिषद में कांग्रेस की संख्या शून्य थी और उनकी मेहनत से चार विधायक वाली पार्टी 27 पर पहुंच गइ।

और कहा कि वह राष्ट्रपति की अवधि पूरी होने के बाद इस्तीफा देने के लिए तैयार थे । लेकिन उन्हें बेइज्जत करके निकाला गया। फिर भी वह राहुल गांधी के कहने पर चुप थे ।लेकिन महा गठबंधन टूटने के बाद से ही बिहार कांग्रेस में बगावत के आसार दिख रहे थे।अशोक चौधरी की निकटता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी ।

उसे देखकर पहले से ही यह अनुमान लगाया जा रहा था कि अशोक चौधरी कभी भी पार्टी छोड़ सकते हैं। बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कौकब कादरी और अशोक चौधरी के बीच आपसी मत भेद पहले से ही चल रहा था।

​चारों सदस्य परिषद के पार्टी छोड़ने की घोषणा के साथ ही बिहार की राजनीति में अटकलों का दौर शुरू हो गया है ।और राजनीतिक विशेषज्ञ इसे जाती मफाद की राजनीति बता रहे हैं । और राजनीतिक ब्यान बाजी भी तेज हो गई है। जबकि इससे बिहार राज्य के मुस्लिम समुदाय के लोग काफी खुश नजर आ रहे हैं ।

क्योंकि अशोक चौधरी जब बिहार के शिक्षा मंत्री थे तो स्पेशल TET में कामयाब उम्मीदवारों को नाकाम करने का हर मुमकिन प्रयास किया और उनके ताबूत में आखिरी कील ठोंकने की भी कोशिश की ।
हलाकि कांग्रेस पार्टी से मुसलमानों ने जो कुर्बत एखतेयार कीया था ।

अशोक चौधरी और कांग्रेस पार्टी उस पर खरा नहीं उतर पाए।और मुसलमानों को अपने करीब करने में नाकाम रहे ।और ऐसा कुछ भी बेहतर काम नहीं हुआ।

जिसकी वजह से मुस्लिम वोटर्स उनके करीब हो सकें ।पद और कुर्सी मिलते ही उन्होंने वही किया जो राजनेताओं की पुरानी रवीश रही है।

बिहार से अनीसुरर्हमान चिश्ती की रिपोर्ट

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