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VIDEO : इज़राइली सैनिकों द्वारा घायल लोगों के इलाज के लिए गाजा के अस्पतालों का संघर्ष

गाजा : स्वास्थ्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि गाजा पट्टी में विरोध प्रदर्शनों के दौरान गोलीबारी के बाद जख्मी एक अन्य फिलिस्तीनी का निधन हो गया है। शुक्रवार को गाजा सीमा पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान 29 वर्षीय फरिस अल-रेगेब को पेट में गोली मार दी गई, जिससे अब मौत की संख्या 18 हो गई।

इजरायल के साथ गाजा सीमा पर इजरायली बंदूकों द्वारा घायल फिलीस्तीनियों के आने से गाजा के अस्पताल जूझ रहे हैं, जिनमें से कई गोलाबारी से घायल हो गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वे रोगियों के इलाज के लिए चिकित्सा आपूर्ति आउट ऑफ कंट्रोल है।

कोई सहयोग नहीं
इजरायल की घातक ताकत का उपयोग से अंतरराष्ट्रीय झल्लाहट पैदा हुआ है, संयुक्त राष्ट्र और अधिकार समूह ने हत्याओं के लिए एक स्वतंत्र जांच की मांग की है, लेकिन सुरक्षा के लिए इजरायल के मंत्री ने कहा है कि इजराइल सेना के कार्यों के लिए संयुक्त राष्ट्र की जांच के साथ सहयोग करने के लिए हमारे पास “कोई कारण नहीं है”।

कई वीडियो फ़िलिस्तीनियों को गोली मारते हुए सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सर्कुलेट हो रहे हैं जिसमें फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों को पीठ में गोली मार रहे हैं या इजरायल के बंदूकधारियों द्वारा नमाज पढ़ते वक्त गोलियां चला रहे हैं और स्नाइपर द्वारा मार दिया जा रहा है। आप इस वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे जालिम पीठ पीछे गोलियां चला कर फिलिस्तीनियों की हत्या की जा रही है। इज़राइली मीडिया के मुताबिक, योजनाबद्ध प्रदर्शनों के लिए सीमा पर 100 से अधिक स्नाइपर तैनात किए गए थे।

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इससे पहले इस्राइली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी में 17 फिलीस्तीनियों की हत्याओं के बाद इजरायल की सुरक्षा बलों की प्रशंसा की है, जैसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इजरायल की सेना के गोला-बारूद के इस्तेमाल पर निंदा की जाती है।

शनिवार को एक वक्तव्य में, नेतन्याहू ने “अपने देश की सीमाओं की रक्षा” के लिए अपने सैनिकों को धन्यवाद दिया और “इज़राइली नागरिकों को [फसह] छुट्टियों को शांतिपूर्वक मनाने” के लिए अनुमति दी। उन्होंने कहा “Well done to our soldiers,”

शुक्रवार को कम से कम 17 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई और 1,400 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इजरायली सेना ने फिलिस्तीनियों के विरोध में गोलाबारी, आंसू गैस और रबड़ से बने इस्पात की गोली से फिलिस्तिनियों को गोली मारी। ग्रेट मार्च ऑफ़ रिटर्न’ शुक्रवार 30 मार्च से शुरू हो रहा है. फ़लस्तीनी इस दिन को ‘लैंड डे’ के तौर पर मनाते हैं. साल 1976 में इसी दिन ज़मीन पर कब्ज़े को ले कर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान इसराइली सुरक्षाबलों में छह फ़लस्तीनियों को मार दिया था.

गज़ा सीमा के साथ-साथ नो-गो ज़ोन बनाया गया था. सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसराइली सेना लगातार इसकी निगरानी करती है. इसराइल में चेतावनी दी है कि कोई भी इस ज़ोन में क़दम ना रखे. इसराइली विदेश मंत्रालय ने कहा है, “इस विरोध प्रदर्शन के ज़रिए वो जानबूझ कर इसराइल के साथ झगड़ा बढ़ाना चाहता है” और “अगर किसी तरह की कोई झड़प हुई तो इसले लिए हमास और प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले फ़लस्तीनी संगठन ज़िम्मेदार होंगे.”

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