क्या सऊदी अरब के लिए फलस्तीन से अब ज्यादा जरुरी हो गया है इजरायल?

क्या सऊदी अरब के लिए फलस्तीन से अब ज्यादा जरुरी हो गया है इजरायल?

अमेरिकी पत्रिका ‘अटलांटिक’ के साथ इंटरव्यू में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा कि फलस्तीनियों के साथ साथ ‘इस्राएल को भी अपनी मातृभूमि का हक’ है.

जब उनसे पूछा गया कि क्या यहूदी लोगों को उनके पू्र्वजों की मातृभूमि के कम से कम एक हिस्से पर अपना देश बनाने का हक है, इसके जवाब में बिन सलमान ने कहा, “मैं मानता हूं कि फलस्तीनियों और इस्राइलियों को अपनी अपनी मातृभूमि का अधिकार है.”

सऊदी अरब 2002 से इस्राएल-फलस्तीन विवाद में दो राष्ट्रों वाले समाधान का समर्थन करता रहा है. लेकिन बिन सलमान पहले वरिष्ठ सऊदी अधिकारी हैं जिन्होंने क्षेत्र में किसी भूमि पर इस्राएल के अधिकार का समर्थन किया है.

माना जाता है कि क्राउन प्रिंस बिन सलमान ही अब सऊदी अरब की सत्ता को चला रहे हैं. हाल के समय में उन्होंने अपने देश में कई सुधार किए हैं.

उनका कहना है, “हमें (फलस्तीनियों और इस्राएलियों) के बीच शांति समझौता चाहिए, ताकि सबके लिए स्थिरता सुनिश्चित की जा सके.” सऊदी अरब ने अब तक आधिकारिक तौर पर इस्राएल को मान्यता नहीं दी है.

उसका कहना है कि इस्राएल के साथ तभी रिश्ते सामान्य हो सकते हैं, जब वह 1967 के युद्ध में कब्जाए गए फलस्तीनी इलाके से पीछे हटे. लेकिन क्राउन प्रिंस के ताजा बयान से फिर इस बात के संकेत मिलते हैं कि दोनों देशों के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं.

पिछले दिनों ही सऊदी अरब ने इस्राएल जाने वाली उड़ानों के लिए अपना वायुक्षेत्र खोला था. इससे पहले नवंबर में इस्राएली कैबिनेट के एक सदस्य ने माना कि पर्दे के पीछे सऊदी अरब और इस्राएल के बीच बातचीत चल रही है. दरअसल दोनों ही क्षेत्र में ईरान के बढ़ते प्रभाव को कम करना चाहते हैं.

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