Sunday , September 23 2018

पाकिस्तान से आई गीता ने मुस्लिम परिवार की बेटी होने के दावे को किया इंकार

बहुचर्चित घटनाक्रम के दौरान पाकिस्तान से वर्ष 2015 में भारत लौटी गीता ने बिहार के उस मुस्लिम दम्पति को पहचानने से आज साफ इंकार कर दिया जो इस मूक-बधिर युवती को अपनी खोयी बेटी बता रहा है। उसने इशारों की जुबान में कहा कि वह हिन्दू देवी-देवताओं की उपासक है और मुस्लिम परिवार से ताल्लुक नहीं रखती। प्रभारी जिलाधिकारी रुचिका चौहान ने संवाददाताओं को बताया कि गीता के माता-पिता की खोज के अभियान के तहत बिहार के सारण जिले के मिर्जापुर गांव निवासी मोहम्मद ईसा, उनकी पत्नी जुलेखा खातून और उनके दो पारिवारिक सदस्यों से मूक-बधिर युवती की मुलाकात कराई गई। उसने इन्हें देखते ही इशारों की जुबान में स्पष्ट तौर पर कहा कि यह उसका परिवार नहीं है। उन्होंने कहा, “गीता ने इशारों में बताया कि वह हिन्दू देवताओं-शंकर और हनुमान की पूजा करती है और मुस्लिम परिवार से ताल्लुक नहीं रखती है।” चौहान ने हालांकि बताया कि संबंधित मुस्लिम पति-पत्नी के डीएनए नमूने ले लिए गए हैं। इन्हें गीता की वल्दियत की जांच के लिए दिल्ली की एक प्रयोगशाला भेजा जायेगा। उन्होंने कहा, “अगर गीता किसी दम्पति को अपने माता-पिता के रूप में पहचान लेगी, तब भी हम उनके डीएनए नमूने जांच के लिए भेजेंगे। आखिरकार डीएनए टेस्ट से ही तय होगा कि इस युवती पर किसी दम्पति का वल्दियत का दावा सही है या नहीं।” चौहान ने बताया कि झारखंड के जामताड़ा जिले के सोखा किशकू के किसान परिवार से भी आज गीता की मुलाकात कराई गई। यह परिवार भी गीता को अपनी खोयी बेटी बता रहा है। उन्होंने बताया कि गीता ने किशकू के परिवार को भी पहचानने से इंकार कर दिया। हालांकि, जांच के लिए इस परिवार के डीएनए नमूने भी ले लिए गए हैं।

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