Saturday , December 16 2017

पहली भारतीय महिला डॉक्टर रुखमाबाई की जयंती पर गूगल ने डूडल बनाकर किया सलाम

पहली महिला डॉक्टर्स रुखमाबाई को  उनकी 153वीं जयंती पर गूगल ने डूडल बनाकर सम्मानित किया है. डूडल में रुखमाबाई को एक ओडस्वी महिला के रूप में दिखाया गया है और उनके आस-पास मरीजों की सेवा में लगे कर्मचारियों को भी दिखाया गया है।
कम उम्र में शादी हो जाने के बाद भी रुक्‍माबाई ने अपनी पढ़ाई पूरी की और डॉक्टर बनीं. रुक्‍माबाई का जन्म जनार्दन पांडुरंग और जयंतीबाई के घर हुआ. जनार्दन पांडुरंग की मृत्यु के बाद जयंतीबाई ने अपनी संपत्ति रुक्‍माबाई को सौंप दी. रुक्‍माबाई तब केवल आठ साल की थीं.

जब वह ग्यारह की हुईं तो उनकी मां ने उनकी शादी दादाजी भिकाजी के साथ कर दी. पर वह अपनी विधवा मां जयंतीबाई के घर में रहती रहीं. जब दादाजी और उनके परिवार ने रुक्माबाई को अपने घर जाने के लिए कहा, तो उन्होंने इनकार कर दिया. उनके सौतेले-पिता (सर्जन सखाराम अर्जुन) ने इस निर्णय का समर्थन किया. रुक्‍माबाई 1889 में इंग्लैंड गईं ताकि वे लंदन स्कूल ऑफ़ मेडिसिन फॉर विमेन में अध्ययन कर सकें. रुक्‍माबाई को मताधिकार कार्यकर्ता ईवा मैकलेरन और वाल्टर मैकलेरन और भारत की महिलाओं को चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए डफ़रिन के फंड की काउंटेस द्वारा सहायता दी गई थी.
रुक्‍माबाई शिक्षा के बाद सूरत में एक अस्पताल में शामिल होने के लिए 1894 में भारत लौट आईं. 1904 में उनके पति भिकाजी की मृत्यु हो गई. 1918 में रुक्‍माबाई ने महिला चिकित्सा सेवा में शामिल होने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया और राजकोट में महिलाओं के लिए एक राज्य अस्पताल में शामिल हो गई. रुक्‍माबाई ने पैंतीस साल तक मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्य किया.

TOPPOPULARRECENT