सरकार बनाम सर्वोच्च न्यायालय की लड़ाई अब न्यायाधीश बनाम मुख्य न्यायधीश में तब्दील हुई

सरकार बनाम सर्वोच्च न्यायालय की लड़ाई अब न्यायाधीश बनाम मुख्य न्यायधीश में तब्दील हुई

सुप्रीम कोर्ट के एक प्रतिष्ठित सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस वी डी तुलजापुरकर ने कहा था कि ‘चापलूस चीफ जस्टिस’ न्यायपालिका की आजादी के लिए एक खतरा है। बी आर अंबेडकर ने संविधान सभा में जजों की नियुक्ति करने में मुख्य न्यायाधीश को वीटो शक्ति का विरोध किया था।

राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) के फैसले में सर्वोच्च न्यायालय के चार न्यायाधीशों ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में ‘मुख्य न्यायाधीश की राय की प्रधानता’ के साथ समझौता करने के आधार पर मोदी सरकार की पहली प्रमुख विधायी पहल को मार दिया था। एकमात्र असहमति जस्टिस जे. चेलामेश्वर द्वारा लिखी गई थी।

चार न्यायाधीशों का मुख्य न्यायाधीश के अधिकार पर सवाल उठाना हमारे न्यायिक इतिहास का सबसे खराब संकट है जिससे पूरी कानूनी बिरादरी इस तरह के विभाजन के साथ सदमे में है। न्यायाधीशों की नियुक्ति और हस्तांतरण के निर्णय अब एक ठहराव पर आ सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में ऐसे संकटों का सामना किया है, लेकिन ये सरकार और अदालत के बीच टकराव थे लेकिन लेकिन वर्तमान संकट अलग है क्योंकि चार न्यायाधीशों ने मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक कार्यों के बारे में कुछ बहुत ही उचित मुद्दों को उठाया है। इसलिए यह अब जज बनाम मुख्य न्यायाधीश है और यह भीतर की लड़ाई है। चारोँ न्यायाधीशों ने जो कहा यह न्यायिक इतिहास में एक ‘असाधारण’ घटना है।

उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि वे “इस मुद्दे का राजनीतिकरण” नहीं करना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि वे यह आश्वस्त हैं कि जब तक सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्रता और अखंडता को संरक्षित नहीं किया जाता, लोकतंत्र एक स्वतंत्र न्यायपालिका के रूप में जीवित नहीं रहेगा जो सफल लोकतंत्र की पहचान है।

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