“Grand alliance” को सिर्फ मुस्लिम वोट चाहिए न कि मुस्लिम चेहराः तारीक अनवर

“Grand alliance” को सिर्फ मुस्लिम वोट चाहिए न कि मुस्लिम चेहराः तारीक अनवर
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फुलवारीशरीफ: बिहार में तीसरे आप्शन तराशने की तैयारी में पीर के रोज़ एमपी और एनसीपी के लीडर तारीक अनवर बिहार झारखंड व उडिसा के मुसलमानों की सबसे बड़ी इदारा इमारत शरिया पहुंचे.

इमारत शरिया के नाजीम मौलाना अनीसुर्रहमान कासमी से मुलाकात करने के बाद सहाफियों को बताया कि समाजवादी पार्टी के सरबराह मुलायम सिंह यादव के साथ मिलकर बिहार को तीसरा आप्शन देने की हिकमत अमली पर काम किया जा रहा है. समाजवादी पार्टी ,पप्पू यादव समेत दिगर छोटी छोटी पार्टियों के साथ बातचीत चल रही है.

छोटी मच्छलियां ही मिलकर बड़ी मछली का शिकार करती है.समाजवादी पार्टी ने इशारा किया है कि तारीक अनवर की कियादत मे ही इलेक्श्न लड़ेगी. फिलहाल इस पर मुलायम सिंह से ठोस जवाब नहीं मिला है. उन्होंने कहा की किसकी कियादत में कौन इलेक्शन लडेगा यह बात मायने नहीं रखता है.

उन्होंने राजद सुप्रिमो लालू प्रसाद और वज़ीर ए आला नीतीश कुमार पर जमकर बरसते हुए कहा की 25 साल तक मुसलमानों को सिर्फ वोट के लिए गुलाम बनाकर रखा.

“Grand alliance” को महज मुस्लिम वोट चाहिए ,न कि मुस्लिम चेहरा राजद और जदयू ने इत्तेहाद (“Grand alliance”) बना कर यह तय कर लिया कि मुस्लिम वोटर के पास कोई आप्शन ही नहीं है. उन्होंने कहा की इत्तेहाद में जदयू ,राजद, एनसीपी ,और समाजवादी पार्टी को शामिल किया गया था.

लेकिन सिटों की तकसीम को लेकर जो Press Briefings की गयी थी.एनसीपी और समाजवादी पार्टी को भरोसा में लिए बैगर सिट को बंटवारा करने का ऐलान कर दिया. मुस्लिम चेहरों और लीडरों को नजरअंदाज कर दिया गया.

Press Briefings मे जदयू ,राजद और काग्रेस पार्टी की ओर से कोइ भी मुस्लिम लीडर स्टेज पर नहीं दिखे। इससे मुस्लिम वोटर्स भी ठगे से महसूस कर रहे है.और तीसरे आप्शन की तालाश में है.

एनसीपी और समाजवादी के इत्तेहाद से मुस्लिम वोटर्स को उम्मीद जगी है. जनाब अनवर ने औवेसी पर कहा कि वह एक फिर्के की सियासत करते है और फिरकापरस्त सियासत करतें है.उनसे कोइ समझौता नहीं होगा.औवेसी के सीमांअचल जिलों में पार्टी के उम्मीदवार खड़ा करने पर कहा कि बिहार की आवाम सेक्युलर है और हमेशा सेक्यूलर पार्टी को ही वोट देते है. साथ में कौंग्रेस लीडर अरशद अब्बास , मुर्शरफ अली के कियादत में इमारत शरिया पहुँचने पर इस्तेकबाल किया गया.

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