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क्या इन वजहों से यूपी में हार गई भाजपा?

गोरखपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर की दो प्रमुख संसदीय सीटों को खो दिया है जो कि अप्रैल 2017 में विधानसभा में प्रवेश के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद से रिक्त थी। समाजवादी पार्टी ने फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा को हराया।

यहां समाजवादी पार्टी के नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल ने भाजपा के कौशलेन्द्र सिंह पटेल पर 59,613 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार प्रवीण कुमार निषाद ने गोरखपुर सीट 21,916 वोटों के अंतर से जीती है।

यह दोनों सीटें भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई थीं। गोरखपुर से 2014 में योगी आदित्यनाथ 530127 मतों के साथ शीर्ष पर रहने में कामयाब रहे, जिसमें 51 प्रतिशत मत लिए थे।

दूसरी तरफ, फूलपुर भी बेहद महत्वपूर्ण लोकसभा सीट है जिस पर साल 2014 में भाजपा ने जीत हासिल की थी। इसका प्रतिनिधित्व जवाहरलाल नेहरू, उनकी बहन विजयलक्ष्मी पंडित और पूर्व प्रधानमंत्री वी पी सिंह ने किया था। यहां से राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य 52.43 प्रतिशत मत (503564) लेकर कामयाब रहे थे।

चूंकि राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता है, इस बार भाजपा को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक साथ आए। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पहली बार उन्होंने हाथ मिलाया और चुनाव जीत गए। गोरखपुर और फूलपुर में बसपा ने सपा उम्मीदवारों का समर्थन करने का फैसला किया है, उन्हें आगामी आम चुनावों के लिए अच्छा संकेत है।

 

 

 

सपा, बसपा ने संभावित रूप से अपने वोटों को जमा किया ताकि भाजपा को उसके गढ़ में हरा सके। घोषणा के बाद से चुनाव परिदृश्य अचानक बदल गया। सपा-बसपा की संयुक्त ताकत के सामने योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के प्रतिनिधित्व वाले निर्वाचन क्षेत्रों पर उनको हार का मुंह देखना पड़ा है। यदि हम 2017 के विधानसभा चुनावों के विश्लेषण पर गौर करते हैं तो सपा, बसपा, कांग्रेस को मिले वोटों से भाजपा को लाभ पहुंचा।

सपा और बसपा ने अपने उम्मीदवार खड़े किये थे जिसका फायदा भाजपा को मिला था। लेकिन उपचुनावों के परिणाम भाजपा के लिए अच्छी खबर नहीं है। यदि हम 2014 लोकसभा चुनावों का सपा, बसपा, कांग्रेस और अपना दल का विश्लेषण करते हैं तो भाजपा को 50.3 प्रतिशत मत मिले और वह शीर्ष पर थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा क्रमशः गोरखपुर और फूलपुर विधानसभा सीटों को रिक्त करने के बाद उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनाव को भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा था।

साल 1991 के बाद से पहली बार भाजपा के खिलाफ सपा-बसपा फूलपुर और गोरखपुर में एक साथ आए हैं। इन उपचुनावों के परिणामों को देखते हुए आगामी वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को त्रिकोणीय लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है।

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