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GST की टैक्स दरों में पूरी तरह से बदलाव की जरूरत : राजस्व सचिव हसमुख अढिया

नई दिल्ली : राजस्व सचिव हसमुख अढिया का कहना है कि छोटे और मध्यम व्यापारियों पर जीएसटी का दबाव कम करने के लिए में इसकी कर दरों को नए सिरे से व्यवस्थित किए जाने की जरूरत है। ताकि छोटे और मध्यम उद्योगो पर भार कम हो. अढिया का ये बयान ऐसे वक्त आया है जब जीएसटी को लागू हुए चार महीने पूरे होने वाले हैं. विपक्ष जीएसटी को लेकर सरकार पर हमलावर है.

अढिया ने एक इंटरव्यू में कहा कि जीएसटी जिसमें एक दर्जन से अधिक केंद्र और राज्य कर शामिल हैं, जिन्हें स्थिर होने में करीब एक साल लगेगा। लागू होने के करीब चार महीने में नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में समस्याएं और अनुपालन से जुड़े मुद्दे सामने आए हैं। इस संबंध में नई प्रणाली से जुड़े निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था जीएसटी काउंसिल ने कई बदलाव किए हैं। अढिया ने कहा कि कमेटी अपने सुझावों को जल्द से जल्द परिषद के सामने लाएगी।

हसमुख अढिया ने कहा, उन्होंने कहा कि बदलाव के लिए फिटमेंट कमेटी को गणना करने की जरुरत होगी, जो यह तय करेगा कि किस वस्तु की दर को तर्क संगत बनाने की जरूरत है. जीएसटी व्यवस्था पहली जुलाई को लागू की गयी. अढिया ने कहा कि समिति अपने सुझावों को जल्द ही जीएसटी परिषद के सामने रखेगी.

गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता व सभी राज्यों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में जीएसटी परिषद की 23वीं बैठक 10 नवंबर को गुवाहाटी में होनी है।

जीएसटी रिटर्न फाइल करने और करों का भुगतान करने में छोटे और मझोले व्यवसायियों की परेशानियों को हल करने और नई कर प्रणाली को इंडस्ट्री फ्रेंडली बनाने के लिए विभिन्न पक्षों में सुधार किया जा रहा है। जीएसटी काउंसिल ने 100 से अधिक वस्तुओं पर कर दरों को युक्तिसंगत बनाया है और निर्यातकों को रिफंड की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है।

यह संभव है समान चैप्टर से कुछ वस्तुओं को विभाजित किया जाए। यहां वस्तुओं के चैप्टरवाइज समानीकरण करने की आवश्यकता है। इसमें जहां यह लगे कि छोटे और मझोले व्यवसायियों और आम आदमी पर कर के बोझ को कम किया जा सकता है, हमें कमी लानी होगी। इससे जीएसटी का सही ढंग से अनुपालन संभव होगा।’

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