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योगी राज में बदतर हुए हालात, ज़िला अस्पताल से बाइक पर ले जानी पड़ी लाश, अस्पताल ने नहीं दी एम्बुलेंस

उत्तरप्रदेश में लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की ख़बर रोज़ाना मीडिया में आती रहती है । कभी ऑक्सीजन स्पलाई रुकने से दर्जनों बच्चों की मौत हो जाती है तो कभी एंबुलेंस नहीं मिलने से कोई मरीज़ अपनी जान गवां देता है । एंबुलेंस नहीं मिलने की वजह से शव को ठेले, साइकिल, बाइक पर ले जाने की खबरें भी यूपी में आम हो गईं हैं ।

अब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के गृह जनपद कौशांबी के जिला अस्पताल से एक बार फिर मानवता को शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई है । शुक्रवार को एक शख्स के शव को उसके परिजन बाइक मे रखकर घर ले गए। अब इस खबर के बाद जिला अस्पताल सफाई देते फिर रहा है।

परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर शव वाहन मुहैया न करने का आरोप लगाया है । लेकिन जिला अस्पताल के प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी मृतक के परिजनों पर शव लेकर भाग जाने की बात कर रहे हैं । लेकिन हैरानी की बात ये है कि इस मामले की जानकारी मुख्य चिकित्साधिकारी को कई घंटे बाद मीडिया के जरिये हुई।

करारी थाना के हिसामपुर गांव का रहने वाला लालता प्रसाद शुक्रवार को पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था । लालता को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में लाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया ।

परिजनों की माने तो शव ले जाने के लिए उन्होंने अस्पताल प्रशासन से शव वाहन की मांग की थी, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद जब वाहन नहीं मिला तो वह बाइक पर ही शव को किसी तरह रखकर घर लेकर चले गए।

जिला अस्पताल के प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद कुमार कन्नौजिया का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने शव का पोस्टमार्टम करने की बात कही तो मृतक लालता के परिजन बाइक पर शव लेकर भाग निकले। जिसकी सूचना उन्होंने मंझनपुर कोतवाली पुलिस को भी दी थी ।
मीडिया में मामला आने के बाद चिकित्सा अधिकारी सफ़ाई ज़रूर दे रहे हैं लेकिन अब पुलिस को पता लगाना है कि इस मामले में झूठ कौन बोल रहा है । हालांकि शव वाहन नहीं मिलने की वजह से इस तरह शव ले जाने का ये कोई पहला मामला नहीं है ।

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