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गुजरात फ़ाइल्स अब उर्दू में, क्या है किताब में ?

अमित शाह के साथ-साथ गुजरात के अनेक वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तथा राजनेताओं के स्टिंग ऑपरेशन पर आधारित बहुचर्चित पुस्तक ‘गुजरात फ़ाइल्स’ अब उर्दू में भी उपलब्ध है, किताब की राइटर जानी मानी पत्रकार राणा अय्यूब हैं । अय्यूब ने कहा था कि अगर इस किताब में सामने आई बातों की निष्पक्ष जांच करके कार्रवाई हो तो देश की राजनीति बदल जाएगी।

राणा अय्यूब ने 2010 में करीब 8 महीने तक अपनी पहचान बदलकर की गई जांच में गुजरात के ऐसे अनेक वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बयान गुप्त रूप से रिकॉर्ड किए थे जो 2001 से 2010 के बीच महत्वपूर्ण पदों पर थे। उन्होंने गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी स्टिंग किया था। इन बयानों के आधार पर राणा ने गुजरात दंगों, इशरत जहां तथा अन्य फर्जी एन्काउंटरों, गृहमंत्री हरेन पांड्या की हत्‍या आदि में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके विश्वासपात्र मंत्री अमित शाह की संलिप्तता का दावा किया है।

अय्यूब के अनुसार उन्होंने ‘तहलका’ की ओर से यह स्टिंग ऑपरेशन किया था लेकिन मोदी के डर से उनकी अपनी पत्रिका सहित कोई अखबार, पत्रिका या टीवी चैनल यह स्टोरी करने को तैयार नहीं हुआ। उन्होंने इसे देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए एक गंभीर चिंताजनक स्थिति बताया। उन्होंने कहा था कि देश में बहुत से पत्रकार सच्चाई को सामने लाने की जद्दोजहद में लगे हैं और उन्हें सत्ता और रसूखदार लोगों के दबाव और दमन का सामना करना पड़ रहा है।

यह किताब इस तथ्य को भी सामने लाती है कि गुजरात में दलित उत्पीड़न और भेदभाव कोई नई बात नहीं है बल्कि नीचे से लेकर ऊपर तक समाज और प्रशासन के पूरे ढांचे में मौजूद है। पुस्तक में शामिल साक्षात्कारों में कई दलित व पिछड़े अफसर अपने साथ भेदभाव की शिकायत करते हैं और यह भी कहते हैं कि सरकार ने उनसे अपने गलत काम करवाने के बाद उन्हें किनारे कर दिया।

राणा अय्यूब अपनी तमाम ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग जांच के लिए बनी किसी एसआईटी को सौंपना चाहती थीं ताकि सही या गलत का फैसला हो सके और न्याय मिल सके। राणा ने कहा था कि सरकारें न्याय करने के प्रति गंभीर ही नहीं हैं। जो काम उन्होंने अकेले किया उसे सीबीआई के 70 अफसरों की टीम नहीं कर सकी, इसकी क्या वजह है?

गुजरात में आतंकवाद के आरोपों में पकड़े गये लोगों की चार्जशीट में शुरुआती 22 पैराग्राफ हूबहू एक जैसे हैं जो सीधे फर्जी होने का साक्ष्य देते हैं लेकिन किसी जांच टीम को यह बात क्यों नहीं दिखाई देती। उल्लेखनीय है कि गुजरात में फ़र्ज़ी मुठभेड़ों पर राणा अय्यूब की स्टोरी को ‘आउटलुक’ पत्रिका ने दुनिया की 20 सबसे ज़्यादा असर डालने वाली मैग्ज़ीन स्टोरीज़ में शामिल किया था। राणा की स्टोरी के आधार पर शुरू हुई जांच से ही गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह को जेल हुई थी और तड़ीपार किया गया था ।

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